भूगोल और आप

बहुत उपयोगी हैं भारत में पशु संसाधन

भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहाँ पशु एक महत्वपूर्ण संसाधन है। यहाँ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। पशु संसाधन से विभिन्न प्रकार की खाद्य वस्तुएँ तो प्राप्त होती ही हैं, साथ ही इनका उपयोग कृषि कार्यों, बोझा ढोने व यातायात के साधनों के रूप में किया जाता है। भारत में विश्व की लगभग 16 प्रतिशत गायें, 50 प्रतिशत भैंसे, 20 प्रतिशत बकरियाँ व 4 प्रतिशत भेड़ें पायी जाती हैं।...

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जानलेवा और विनाशकारी होती हैं सुनामी तरंगें

जापान में सु-नाह-मी के नाम से जाना जाने वाला यह शब्द आमतौर पर अपने प्रचलित रूप में सुनामी के रूप में विख्यात है। समुद्र में कंपन के फलस्वरूप जो तेज और ऊँची लहरें उठती हैं, वे एक के बाद एक लगातार आती रहती हैं और आम तरंगों से कई गुणा ज्यादा ताकतवर होती हैं । दरअसल सुनामी जापानी भाषा का शब्द है, जिसका मतलब होता है समुद्रतटीय तरंगें। यह जापानी भाषा के दो शब्दों को मिलाकर बनाया गया है- ‘सू’ यानी...

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वन प्रबंधन में जेएफएम समितियों की भूमिका

भारत सरकार द्वारा 1990 में संयुक्त वन प्रबंधन के संबंध में सामर्थ्यकारी दिशा-निर्देश जारी किए जाने के बाद से भारत में संयुक्त वन प्रबंधन (जेएफएम) वन प्रबंधन की आधारशिला बन चुका है। इन दिशा-निर्देशों को वनों की रक्षा करने, उनका उपयोग करने तथा प्रबंधन करने के मामले में समुदायों की भूमिका को बदलते परिप्रेक्ष्य में लागू किए जाने के व्यापक प्रयास के तौर पर देखा गया  है, जैसा कि राष्ट्रीय वन...

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देखना हो विजय नगर तो जायें हंपी

हंपी, भगवान शिव के विरूपाक्ष मंदिर अथवा पंपापति का स्थान है जोकि विजय नगर के राजाओं के पारंपरिक एवं पारिवारिक भगवान थे। यह मंदिर बेलारी जिले में तुंगभद्रा नदी के दक्षिणी किनारे पर स्थित है और यह कर्नाटक में होसपेट शहर से नौ मील की दूरी पर है। यह विजय नगर का सबसे पुराना और पवित्र मंदिर है। यह मंदिर 1565 ईस्वी में तालीकोटा के युद्ध में विनाश से अद्भुत तरीके से बच गया था। आरंभ में इस महान एवं...

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घटती जैव विविघता को बचाने की आवश्यक्ता

जैव विविधता पृथ्वी पर जीवधारियों की विविधता को जैव विविधता  Bio-Diversity कहा जाता है। किसी क्षेत्र की जैव विविधता पृथ्वी के भौतिक पर्यावरण के परिवर्तन स्वरूप उद्विकास विसरण तथा विलोपन की प्रक्रियाओं का प्रतिफल होता है। वर्तमान में मानवीय गतिविधियों के कारण पृथ्वी की जैव विविधता तेजी से घट रही है। इसलिए यह पृथ्वी के प्रमुख खतरों में सम्मिलित है। बढ़ती हुई मानवीय जनसंख्या की उदर पूर्ति...

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एक बार अवश्य करें चार धामों की यात्रा

देवभूमि के नाम से प्रसिद्ध उत्तराखण्ड के हिमालय की दुर्गम तथा मनोरम वादियों में हिन्दु आस्था के प्रतीक माने जाने वाले कई तीर्थ स्थल मौजूद हैं। इन तीर्थ स्थलों में यमुनोत्रा, गंगोत्रा, केदारनाथ तथा बदरीनाथ जैसे धामों का विशेष महत्व है। हिन्दू धर्म में आस्था रखने वाले प्रत्येक व्यक्ति की यह कामना होती है कि अपने जीवन में कम से कम एक बार वह इन चारों धामों की यात्रा कर अपने वर्तमान तथा...

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भूगोल में अतिवाद की विचारधारा का सूत्रपात

1970 के दशक के आते-आते विश्व के न केवल विकासशील एवं अविकसित देशों में समस्यायें गंभीर हुईं अपितु कुछ समस्याओं ने विकसित देशों में तेजी धारण करना शुरू कर दिया। इन समस्याओं का प्रभाव लोगों और क्षेत्रों के बीच सामाजिक, आर्थिक स्थर व पर्यावरण आदि पर पड़ने लगा। जिसने ऐसे परिवेश को उत्पन्न किया जिसमें एक नई विचारधारा की आवश्यकता की मांग होने लगी। जो लोगों की समस्याओं के समाधान में सहायक हो।...

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औद्योगिक उन्नति हेतु विशेष आर्थिक क्षेत्र का निर्माण

विशेष आर्थिक क्षेत्र देश की भौगोलिक सीमा के अन्दर स्थित ऐसा ‘शुल्क मुक्त’  क्षेत्र है, जिसे व्यापार संचालन, शुल्क तथा प्रशुल्कों की दृष्टि से विदेशी क्षेत्रों के समान माना जाता है। यह एक ऐसा औद्योगिक क्षेत्र है जो सामान्य रूप से निवेशकों को आकर्षित करने के लिए उदार आर्थिक नीतियों एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की आधारभूत सुविधाओं एवं आवश्यकताओं से सम्पन्न होता है। उद्देश्य  इन क्षेत्रों...

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आठ वर्ष से लापता चंद्र यान-1 का पता चला

अगस्त 2009, में लापता हुए भारत के चंद्र यान -1 को ढूंढ निकाला गया है। यह चंद्र यान चंद्रमा की सतह से 200 किलोमीटर ऊपर कक्षा में स्थित है और चक्कर काट रहा है। नासा के वैज्ञानिक लूनर रिकोनाइसां आर्बिटर यानि एलआरओ को खोजने के एक मिशन के दौरान, इसरो द्वारा 2008 में प्रक्षेपित चंद्र यान-1 को भी ढूंढ निकाला। दो साल के लिए चंद्र-अभियान पर भेजे गये इस यान का मिशन चंद्रमा की सतह और वहां उपस्थित धातुओं के...

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सागर की तली में मौजूद हैं भविष्य की जरूरतें

पिछली दो शताब्दियों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में कल्पनातीत प्रगति होने के परोक्ष प्रभावस्वरूप मानव आबादी में भी अत्यधिक वृद्धि हुई है। आज पृथ्वी पर जितने मनुष्य निवास करते हैं उतने इतिहास के किसी भी काल में नहीं करते थे। साथ ही मनुष्य की भौतिक आवश्यकताओं में जितनी बढ़ोतरी हुई है उतनी पहले कभी भी नहीं हुई थी। आज हर व्यक्ति औसतन जितनी ऊर्जा खर्च कर रहा है उतनी उसने पहले...