कवकधारी मछली की प्राप्ति का क्षेत्र व उपयोग संभाव्यता

Bhugol-Aur-Aap

कवकधारी मछली अथवा प्रकाशवान मछलियां मेसोपेलॉजिक मछलियों का समूह हैं जो मध्य, पश्चिमी और उत्तरी अरब सागर में प्रचुरता से तथा भारतीय अनन्य आर्थिक क्षेत्र में मध्यम प्रचुरता में पाई जाती हैं। वर्ष 2007-12 के दौरान किए गए सजीव समुद्री संसाधन सर्वेक्षणों के फलस्वरूप भारतीय अनन्य आर्थिक क्षेत्र में कवकधारी मछली की संसाधन उपलब्धता को लगभग 1 मिलियन टन आंका गया था जिनमें डायफर्स वटेसी, मिक्टोफम स्पाइनोसोम, और बेंथोसेमा फिबुलेटम जैसी प्रजातियों का बाहुल्य है।

एफएओ की तकनीकी रिपोर्ट में प्रकाशित ‘मेसोप्लेजिक मत्स्य के वैश्विक संसाधनों की समीक्षा’ नामक लेख में कवकधारी मछली की वैश्विक मत्स्ययन संभाव्यता को लगभग 600 मिलियन टन आंका गया है और इसका सबसे अधिक संकेंद्रण अवन की खाड़ी, ओमान की खाड़ी और पाकिस्तान के तट के साथ उत्तरी अरब सागर में अनुमानित है। अमेरिकी ग्लोबैक एकाउस्टिक 1993 सर्वेक्षण में अरब सागर में कवकधारी मछलियों की संभाव्यता 100 मिलियन टन आंकी गई है जिसमें बेंथोसेमा पीटेरोटम की प्रधानता है। ये सभी मछली अल्पजीवी हैं और इनका जीवन काल एक वर्ष से भी कम है। ऐसा अनुमान है कि बायोमॉस का पुनः सृजन वार्षिक आधार पर होता है जिससे ट्रॉफिक संबंधों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव डाले बगैर इसके वाणिज्यिक दोहन की प्रबल संभावना है। 10 प्रतिशत एकत्रण से भी 10 मिलियन टन कवकधारी मछली प्राप्त की जा सकती है जो कि समुद्री क्षेत्र से भारत के औसत वार्षिक उपज का तीन गुना है।

कवकधारी मछली के मांस में वैक्स और लिपिड की उच्च मात्रा पायी जाती है और इसलिए यह सीधे ही मानव उपयोग के लिए उपयुक्त नहीं होती। कवकधारी मछलियों के वाणिज्यिक पैमाने पर मत्स्ययन का उपक्रम करने से पहले हार्वेस्टिंग, पोस्ट हार्वेस्टिंग और उत्पादन विकास पर प्रौद्योगिकीय चुनौतियों को दूर किए जाने की जरूरत है। सजीव समुद्री संसाधनों के प्रारंभिक परिणाम यह दर्शाते हैं कि कवकधारी मछली के तेल में पोली अनसैचुरेटेड फैटी एसिडों खासकर, उच्च डीएचए एवं इपीए स्तरों वाले ओमेगा-3 की भारी मात्रा पाई जाती है जो तैलीय सारडिनो के तेल के समतुल्य है। इसलिए, पशुओं, कुक्कुट और जलीय जीवों के भोजन के तौर पर कवकधारी मछलियों के उपयोग की अच्छी संभाव्यता मौजूद है।

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