कोविड-19 का परीक्षण व टीका विकास

Health

सार्स-सीओवी-2 (SARS-CoV-2) वायरस से फैली कोविड-19 (COVID-19) बीमारी की चपेट में अमूमन विश्व का अधिकांश देश आ गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन डैशबोर्ड के अनुसार 23 मार्च, 2020 तक विश्व के 186 देशों में 2,94,110 लोगों में इस वायरस के संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है जबकि 12,994 लोगों की मौत हो चुकी है। अकेले इटली में 4827 लोगों की मौत हो चुकी है। विश्व के कई देशों में लॉकडाउन की घोषणा की जा चुकी है। कोविड-19 को विश्व स्वास्थ्य संगठन पहले ही पैंडेमिक घोषित कर चुका है। इसका संक्रमण और नहीं फैले, इसके लिए ‘सामाजिक अलगाव’ यानी सोशल आइसोलेशन की अपील की जा रही है। भारत में भी 22 मार्च को ‘जनता कर्फ्यू’ की घोषणा की गई थी और 23 मार्च से राजधानी दिल्ली में लॉकडाउन की घोषणा की गई। वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन विश्व के विभिन्न देशों से ‘टेस्ट, टेस्ट और टेस्ट’ की अपील कर रहा है। अर्थात अधिक से अधिक लोगों का परीक्षण किया जाये। दूसरी ओर विश्व के वैज्ञानिक समुदाय इस बीमारी पर नियंत्रण के लिए टीका विकास के प्रयास में लगे हुये हैं। यहां हम यह जानने का प्रयास करते हैं कि कोविड-19 का टेस्ट कैसे किया जा रहा है और टीका विकास में क्या प्रगति हुयी  है। यहां इसके बारे में महज सामान्य परिचय दिया गया है ताकि इसके बारे में सामान्य जानकारी प्राप्त की जा सके।

आरटी-पीसीआर टेस्ट

सार्स-सीओवी-2 उस वायरस का नाम है जो कोविड-19 नामक बीमारी के लिए जिम्मेदार है। कोविड-19 वस्तुतः कोरोनावायरस बीमारी 2019 का संक्षिप्त रूप है और इस बीमारी का नामकरण विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा किया गया है। इस बीमारी के लक्षण तो आम ही हैं जैसे कि कफ, बुखार या सांस लेने में परेशानी। ऐसे में यह जानना मुश्किल होता है कि इन लक्षणों से युक्त लोग कोरोनावायरस से संक्रमित हैं या नहीं। इसका निर्धारण टेस्ट से किया जाता है। किसी व्यक्ति में कफ, बुखार के लक्षण पाये जाने पर या सांस लेने में तकलीफ की शिकायत पर, त्वरित रूप से यह जानने के लिए कि वह कोरोनावायरस से संक्रमित है, अस्पताल के कर्मचारियों द्वारा आरटी-पीसीआर टेस्ट किया जाता है। आरटी-पीसीआर से तात्पर्य है ‘रियल टाइम रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेस-पोलीमर्स चेन रिएक्शन’ (rRT-PCR: real-time reverse transcription polymerase chain reaction )। आशंका वाले मरीजों की नाक या गले से नमूना (स्वैब) लिया जाता है। जब स्वैब का नमूना लिया जाता है तो उसके साथ कुछ कोशिकाएं भी आ जाती हैं जिनमें वायरस हो सकता है। फिर इस नमूना को परीक्षण के लिए लैब भेजा जाता है। भारत में पुणे स्थित राष्ट्रीय वायरोलॉजी संस्थान को परीक्षण के लिए भेजा जाता है। परीक्षण में सार्स-सीओवी-2 आरएनए की मौजूदगी का पता लगाया जाता है। इसी के आधार पर सकारात्मक या नकारात्मक परिणाम बताये जाते है।

टीका का विकास

चूंकि सार्स-सीओवी-2, कोरोनावायरस का नया रूप है इसलिए इसके लिए पहले से कोई टीका मौजूद नहीं है। लेकिन वायरस के सामने आने के पश्चात विभिन्न देशों में इसके लिए टीका विकास परीक्षण के दौर में है।  किसी बीमारी के लिए टीका का विकास कई चरणों से होकर गुजरता है। टीका के विकास के पश्चात सर्वप्रथम कुछ लोगों पर परीक्षण किया जाता है जिसे चरण-1 क्लिनिक अध्ययन कहा जाता है। दूसरे चरण में अधिक लोगों पर इस टीका का परीक्षण किया जाता है। इस दौरान उसका परिणाम एवं दुष्प्रभावों का अध्ययन किया जाता है। तीसरे चरण में प्राकृतिक संक्रमण की दशा में इसका परीक्षण किया जाता है। इस परीक्षण में हजारों स्वास्थ्यकर्मियों को शामिल किया जाता है ताकि उन दुर्लभ समस्याओं को पहचाना जा सके जिसे आरंभिक चरणों में नहीं पहचाना गया है।

चूंकि जिस बीमारी के लिए टीका का विकास किया जाता है, उस टीका में उसी बग के जैसा तत्व होता है जो बीमारी के लिए जिम्मेदार होता है। दूसरे शब्दों में कहें जो यह रोगजनक की नकल होती है अर्थात टीका भी अनिवार्य रूप से अनुक्रमण संक्रमण (mimicked infection) ही है। इसका यह भी मतलब है कि जिस संक्रमण से बीमारी फैली है उसके लक्षणों एवं विशेषताओं के बारे में विस्तृत जानकारी जरूरी है।

टीका का विकास मुख्यतः दो तरीके से किया जाता है। प्रथम तरीके में ऐसी टीका का विकास किया जाता है जो अपने आप में एक संक्रमण हो लेकिन यह मूल माइक्रोब का रूप होना चाहिए जो आपको बीमार नहीं करे। इसमें संक्रमण के द्वारा शरीर की प्रतिरक्षी प्रणाली को उत्प्रेरित किया जाता है। इससे यह होता है कि अगली बार जब वही बग आक्रमण करता है तब प्रतिरक्षी प्रणाली उसे निष्क्रिय कर देती है। एक दूसरा तरीका है कि उसी बग से ऐसा तत्व तैयार किया जाये जो संक्रमण नहीं फैलाये वरन् प्रतिक्रिया के लिए उत्प्रेरित करे। इसे निर्जीव टीका भी कहा जाता है।

जहां तक कोविड-19 बीमारी के खिलाफ टीका विकास की बात है तो विश्व के कई देशों में इसके लिए प्रयास जारी हैं। चीन में सिनोवाक कंपनी द्वारा गैर-सक्रिय टीका का परीक्षण किया जा रहा है। इसके तहत फॉर्मेलडीहाइड नामक रसायन से वायरस को मारकर शुद्ध किये गये कोविड-19 वायरस का उपयोग किया गया है। दूसरी ओर संयुक्त राज्य अमेरिका में मोडर्ना नामक जैव प्रौद्योगिकी कंपनी द्वारा एमआरएनए-1273 (mRNA-1273: messenger ribonucleic acid -1273) टीका का परीक्षण किया जा रहा है। इस टीका का विकास एमआरएनएन नामक आनुवंशिक प्लेटफार्म का उपयोग करके किया गया है। यह आरएनए का अंश है जिसमें वह कोड समाहित होता है जो कोशिकाओं में प्रवेश कराने के पश्चात कोविड-19 वायरस स्पाइक प्रोटीन का निर्माण करता है।

स्वाभाविक संरक्षणः वैज्ञानिकों का यह भी मानना है कि जो लोग वायरस से संक्रमित हुये हैं वे कोविड-19 के खिलाफ एंडीबॉडी विकसित कर लिये होंगे और उन्हें भविष्य में सार्स-सीओवी-2 के हमले से बचाएगा। हालांकि वैज्ञानिकों के लिए यह वायरस काफी नया है इस संबंध में अधिक जानकारी नहीं प्राप्त हो पायी है।

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