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केन्या की भ्रंश घाटी में आयी दरार

क्या अफ्रीका दो हिस्सों में विभाजित हो रहा है?

By: Staff Reporter
भूगोल और आप

केन्या की भ्रंश घाटी (रिफ्ट वैली) में भारी वर्षा के पश्चात आयी दरार से कुछ लोगों ने अनुमान लगाना आरंभ कर दिया है कि अफ्रीका महाद्वीप, जो मानव विकास के इतिहास का साक्षी रहा है, दो हिस्सों में विभाजित हो रहा है। दरअसल जिस क्षेत्र में दरार देखी गयी है वह ग्रेट रिफ्ट वैली का हिस्सा है। यह दरार पूर्वी अफ्रीकी रिफ्ट का हिस्सा है। हालांकि जो साक्ष्य उपलब्ध हैं उससे यह प्रतीत नहीं होता है कि रिफ्ट वैली में दरार का कारण टेक्टोनिक शिफ्ट है। जिस स्थल पर दरार है वहां दोनों विभाजित हिस्सों में समानता नहीं दिख रही है। वहां भूमि अपरदन की संभावना अधिक दिखती है। उस स्थल से केन्या की राजधानी नैरोबी महज 50 किलोमीटर दूर है। यदि विवर्तनिक हलचल या भूकंप के कारण दरार आयी होती तो नैरोबी में भूकंप का मापन जरूर किया गया होता। परंतु केन्या में किसी बड़े भूकंप को रिकॉर्ड नहीं किया गया।

वास्तविकता क्या है?

स्थानीय डेली नेशन पत्रिका के अनुसार आलोच्य क्षेत्र में विगत दिनों भारी वर्षा हुयी थी। वहां की मिट्टी में पास के माउंट लोंगोनोट ज्वालामुखी का राख जमा हो गया था। वर्षा के बाद यही राख, मिट्टी से बाहर आ गया जिसके कारण एक बड़े क्षेत्र में दरार पैदा हो गयी।

क्या होती है रिफ्ट घाटी?

रिफ्ट या भ्रंश घाटी उस निम्न भूमि को कहा जाता है जहां विवर्तनिक प्लेटों में दरार आती है या वे अलग-अलग होती हैं। 3700 मील लंबी पूर्वी अफ्रीकी रिफ्ट दो छोटी प्रणालियों से मिलकर बनी है। ये दो प्रणालियां हैं; ग्रेगरी रिफ्ट एवं वेस्टर्न रिफ्ट। ये दोनों प्रणालियां ज्वालामुखी से युक्त हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक उपर्युक्त दोनों रिफ्ट बड़ी होती जा रही हैं क्योंकि पूर्व में सोमाली प्लेट एवं पश्चिम में नुबियन प्लेट नामक दो विवर्तनिक प्लेटें एक-दूसरे से दूर जा रही हैं।

क्या हैं विवर्तनिक प्लेटें?

पृथ्वी का स्थलमंडल (जो क्रस्ट और मैंटल के ऊपरी हिस्सों से बना है) कई विवर्तनिक प्लेटों (टेक्टोनिक प्लेट) में विभाजित है। ये सभी प्लेट स्थिर नहीं हैं बल्कि एक-दूसरे की अपेक्षा भिन्न गतियों से गतिमान हैं। इतने वजनदार होने के बावजूद इनका तैरना या गतिमान होना आश्चर्यजनक है। इन प्लेटों के गतिमान होने के वास्तविक कारणों पर अभी वैज्ञानिकों के बीच बहस जारी है। कई वैज्ञानिकों की राय है कि इन प्लेटों के गतिमान होने के लिए एस्थीनोस्फेयर के भीतर की संवहनीय धारा एवं प्लेटों के बीच की सीमाओं के बीच सृजित बल जिम्मेदार हो सकते हैं। ये बल न केवल प्लेटों की गति के लिए उत्तरदायी हैं वरन् ये प्लेटों में दरार भी पैदा करते हैं। इससे रिफ्ट या भ्रंश का निर्माण होता है और प्लेट की नई सीमाएं भी निर्धारित होती हैं। यूएसजीएस के मुताबिक इन प्लेटों की गति के लिए इनकी चट्टानी संरचना जिम्मेदार होती हैं। उदाहरण के तौर पर, महाद्वीपीय क्रस्ट (भूपर्पटी) का निर्माण ग्रेनाइट चट्टानों से हुआ है जो क्वार्ट्ज एवं फेल्सपर नामक अपेक्षाकृत हल्के खनिजों से बना है। इसके विपरीत महासागरीय क्रस्ट का निर्माण बेसाल्ट चट्टानों से हुआ है जो अधिक घना एवं भारी है। चूंकि महाद्वीपीय चट्टानें काफी हल्की हैं इसलिए महाद्वीपों के नीचे का क्रस्ट अधिक मोटा है (लगभग 100 किलोमीटर ) वहीं महासागरों के नीचे का क्रस्ट अपेक्षाकृत कम मोटा है, केवल 5 किलोमीटर मोटा।

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