गहरी खाइयों से कटा हुआ है समुद्र तल

Bhugol-Aur-Aap

1930 के दशक के उत्तरार्द्ध से समुद्री भूगर्भशास्त्र में नई तकनीकों का सूत्रपात हो चुका है। गुरूत्व मापन और बिंबयोजना के कारण समुद्र की सतह और तली संरचना का सही-सही मापन संभव हुआ है। समुद्र तल भारी पर्वत श्रृंखलाओं, मध्य-सागरीय पर्वत मालाओं से घिरा हुआ है जो वैश्विक नेटवर्क का निर्माण करता है और वह 80,000 किलोमीटर से अधिक क्षेत्रों में फैला हुआ है। आइसलैंड, एसेनसन और गैलापैगोस द्वीप समूह जैसे स्थानों पर पर्वतमालाएं समुद्र के स्तर से ऊपर तक उठी हैं। समुद्र तल भी गहरी खाइयों से कटा हुआ है, जो उपसंवहन जोनों को अंकित करती हैं तथा जो पृथक समुद्री पर्वतों से चिह्नित होते हैं।

मध्य अटलांटिक पर्वतमाला के पुराचुंबकीय अध्ययनों से इस सम्बंध में प्रमुख सूचना प्राप्त हुई है। यह पाया गया कि आइसलैंड के समीप पर्वतमाला-अक्ष के प्रत्येक भाग में केवल आधे चट्टानी क्षेत्रों में ही सामान्य चुंबकीय ध्रुवता मौजूद थी, शेष क्षेत्रों में प्रतिलोम ध्रुवता थी (चुंबकीय सूई दक्षिण की ओर संकेत करती है)। पर्वतमाला के शिखर के प्रत्येक भाग में समुद्री भूपृष्ठ की चुंबकीय पट्टी में सामान्य और प्रतिलोम ध्रुवता के पैटर्न देखे जाते हैं। भिन्न प्लेट मार्जिन के पास लावा निकलते रहने के कारण विभिन्न क्षेत्रों का निर्माण होता रहता है और सामान्य तथा प्रतिलोम ध्रुवता का वैकल्पिक पैटर्न बनाता है। मध्य समुद्री पर्वतमालाओं और इनमें जुड़ी भ्रंशजोनों में समुद्र तल पैदा होते हैं, जो फिर बाद के पार्श्व मैटल के संचलन के कारण दूर होते रहते हैं। अलग-अलग पट्टियों की आयु की गणना करने पर यह पाया गया कि हिम शिखर से बढ़ती दूरी पर अवस्थित चट्टानें अधिक पुरानी थीं। यह घटना लचीली, काफी कमजोर ऊपरी पपड़ी या एस्थीलोस्फेयर में संचलन धाराओं के कारण होती है।

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