WordPress database error: [Table './geograph_gny/gnywordpress_usermeta' is marked as crashed and should be repaired]
SELECT user_id, meta_key, meta_value FROM gnywordpress_usermeta WHERE user_id IN (2154) ORDER BY umeta_id ASC

china moon mission geography and you

चंद्रमा के डार्क साइड पर चीनी अंतरिक्ष मिशन

भूगोल और आप

नव वर्ष 2019 की शुरुआत के साथ ही पृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह चंद्रमा ने ‘चांग ए-4‘ (Chang’e 4) नामक एक नए अतिथि का स्वागत किया। परंतु यह अतिथि इस रूप में भिन्न था कि इसने चंद्रमा के उस हिस्सा पर अपने कदम रखे जहां आज तक कोई मानव अंतरिक्ष यान नहीं पहुंच सका। हालांकि पूर्व में प्रयास जरूर किए गए परंतु सफलता नहीं मिली। दरअसल इस बार चंद्रमा के तथाकथित ‘डार्क साइड’ पर कोई रोवर चहलकदमी करने में सफल रहा।

चीन का चांग’ए-4 मिशन जिसे 7 दिसंबर, 2018 को प्रक्षेपित किया गया था, 3 जनवरी, 2019 को चंद्रमा के डार्क साइड पर उतरा। डार्क साइड पर उतरने वाला यह प्रथम अंतरिक्षयान है। इस अंतरिक्ष यान का ‘युतु 2’ नामक रोवर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव-ऐतकेन बेसिन क्षेत्र में स्थित वॉन कारमान क्रेटर पर उतरकर मिशन के उद्देश्यों का पूरा करना आरंभ किया। चीन ने मिशन की सफल लैंडिंग के पश्चात भेजी गई तस्वीर भी विश्व के साथ साझा किया। दरअसल ‘युतु’ चीनी मिथकों में चंद्र देवी चांग’ए का पालतू खरगोश का नाम है। वैश्विक स्तर पर सर्वेक्षण के पश्चात इसे युतु नाम दिया गया है।

चीनी अंतरिक्ष मिशन के अनुसार चांग’ए 4 मिशन का उद्देश्य डार्क साइड की तस्वीर भेजने के साथ-साथ उसकी मृदा का परीक्षण भी है। इसके अलावा वहां छोटा बगीचा लगाने की भी योजना है। इसके लिए छह प्रजातियां भी भेजी गई हैं जिनमें कॉटन, आलू, रेपसीड, खमीर तथा अराबिडोप्सिस नामक फूल शामिल हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि भविष्य में चीन चंद्रमा पर अपना अंतरिक्षयात्री उतारने की योजना पर काम कर रहा है। इसलिए पहले से ही उसकी जमीन तैयार की जा रही है।

क्या है चंद्रमा का डार्क साइड ?

हम प्रतिदिन चंद्रमा का एक ही हिस्सा देखते हैं भले ही आज देखें या एक सप्ताह बाद देखें। उसका दूसरा हिस्सा जिसे ‘डार्क साइड’ कहा जाता है, हम कभी नहीं देख पाते। इसका कारण है कि चंद्रमा की घूर्णन अवधि 27 दिन है और लगभग इतनी ही अवधि वह पृथ्वी की परिक्रमा करने में लेता है। इस पूरी  प्रक्रिया में हम चंद्रमा का केवल 59 प्रतिशत ही देख पाते हैं, शेष 41 प्रतिशत हिस्सा हमारे सामने आता ही नहीं। इस हिस्से को ‘डार्क साइड‘ कहने का यह मतलब कतई नहीं है कि वहां हमेशा अंधेरा रहता है। चूंकि यह हिस्सा पृथ्वी से कभी दिखाई नहीं देता इसलिए इसे ‘डार्क साइड’ के नाम से संबोधित किया जाता है। इस डार्क साइड की प्रथम तस्वीर सोवियत संघ के लूना 3 अंतरिक्षयान ने 1959 में ली थी। इसके पश्चात इपिक सहित नासा के भी कई अंतरिक्ष मिशनों ने डार्क साइड की तस्वीर ली। परंतु इनमें से कोई भी मिशन वहां उतरने में सफल नहीं रहा है। वर्ष 1968 में अपोलो-8 अंतरिक्षयान के अंतरिक्षयात्रियों ने पहलीर बार कथित डार्क साइड की को देखने की कोशिश की। हालांकि उस क्षेत्र में पहुंचते ही अंतरिक्षयान की सारी संचार प्रणाली ठप्प हो गई। बाद में जब अंतरिक्षयान उससे दूर हुआ तब जमीन पर स्थित नियंत्रण से संचार प्रणाली फिर से स्थापित हो सकी। चांग’ए 4 मिशन ने भी सीधे तस्वीर नहीं भेजकर चीन द्वारा प्रक्षेपित किसी अन्य संचार उपग्रह को ये तस्वीर भेजा। फिर वहां से इसे प्राप्त की गई।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *