मधुमक्खियों की संख्या में कमी

निकोटिनॉइड्स श्रेणी के कीटनाशकों पर यूरोपीय संघ में प्रतिबंध

By: Staff Reporter
भूगोल और आप

यूरोपीय संघ के सदस्यों ने निकोटिनॉइड्स कीटनाशक के आउटडोर प्रयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। विभिन्न वैज्ञानिक अध्ययनों ने मधुमक्खियों की संख्या में कमी के लिए इस कीटनाशक को जिम्मेदार ठहराया है। यूरोपीय खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण (ईएफएसए) ने फरवरी 2018 में ही इस कीटनाशक के मधुमक्खियों पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव की अभिपुष्टि कर दिया था। इसी के पश्चात यूरोपीय संघ ने इस कीटनाशक के आउटडोर प्रयोग को प्रतिबंधित करने का निर्णय लिया। आउटडोर प्रतिबंध का मतलब है कि इसका ग्रीनहाउस में उपयोग जारी रहेगा।

ज्ञातव्य है कि निकोटिनॉइड्स श्रेणी के कीटनाशक विश्व में सर्वाधिक प्रयुक्त होते हैं। यही कारण है कि यूरोपीय संघ ने वर्ष 2013 में भी निकोटिनॉइड्स श्रेणी के तीन रसायनों को कुछ फसलों (मक्का, गेहूं, जौ, ओट इत्यादि) के लिए प्रतिबंधित कर दिया था। ये तीन श्रेणियां हैं; इमिडैक्लोप्रिड, क्लोथियानिडिन और थियामीथोजाम। ये रसायन मधुमक्खियों को खुराक प्राप्त करने व कॉलनियां बसाने की क्षमता को नुकसान पहुंचाते हैं। किंतु यूरोपीय संघ ने अब इसके संपूर्ण प्रयोग को प्रतिबंधित करने का निर्णय किया है। इसकी मुख्य वजह यह है कि मधुमक्खियां जैव विविधता, खाद्य उत्पादन एवं पर्यावरण के लिए अति महत्वपूर्ण हैं।

पर यहां इस प्रतिबंध के दो पक्ष हैं। इसका प्रथम पक्ष यह है कि निकोटिनॉइड्स श्रेणी के तीन रसायनों के प्रयोग को प्रतिबंधित किया है। इस श्रेणी के दो अन्य रसायनों थियोक्लोप्रिड एवं सल्फोक्साफ्लोर पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। इसके अलावा इसके आउटडोर प्रयोग को प्रतिबंधित किया गया है, ग्रीनहाउस प्रयोग जारी रहेगा। पर्यावरणविदों को चिंता है कि ये रसायन जल आपूर्ति में घूल सकते हैं। वहीं दूसरा पक्ष, इस प्रतिबंध का विरोध करने वालों से संबंधित है। इनका तर्क है कि इन कीटनाशकों का प्रतिबंध किसी वैज्ञानिक प्रमाण पर आधारित नहीं है। उनका यह भी तर्क है कि अब तक के प्रतिबंध से अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं हुये हैं।

निकोटिनॉइड्स निकोटीन के समान ही तंत्रिका-सक्रिय रसायन हैं जो कीटों, विशेषकर एफिड्स एवं जड़ आहारी कीड़ों से फसलों को सुरक्षित रखने में कारगर रहे हैं। परंतु वर्षों के शोध ने यह दर्शाया है कि ये रसायन मधुमक्खियों की सीखने की क्षमता एवं स्मरण को प्रभावित करते हैं और उनकी मधु देने व परागण को भी प्रभावित करते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *