भारत के लिए एकीकृत जल संसाधन ढ़ांचा

भूगोल और आप

व्यापक आयोजना प्रक्रिया को सहभागिता पूर्वक जल संसाधन सरोकारों की पहचान तथा समाधान सहित ऐसी योजनाओं के विकास एवं कार्यान्वयन की दिशा में कार्य करना चाहिए जो जल निकासी प्रणालियों के विभिन्न संयोजन स्तरों पर पर्यावरणिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से धारणीय हों। यह समझना महत्वपूर्ण है कि एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन का अर्थ केवल किसी जलवैज्ञानिक यूनिट के भीतर किए जाने वाले कार्यकलापों की इन्वेंट्री का रख रखाव ही नहीं है। इसके लिए, जल निकासी द्रोणी के भीतर प्रस्तावित सभी कार्यवाहियों के कारण एवं प्रभाव के मूल्यांकन के लिए अपेक्षित सूचनाओं का मिलान भी जरूरी है।

जल संभर ऐसी सबसे छोटी यूनिट है जिसमें प्राकृतिक संसाधनों पर मानव प्रेरित प्रभावों का मूल्यांकन संभव होता है। जलसंभर स्तर पर इसका प्रभाव, जल निकासी द्रोणी के भीतर उच्च स्तर पर अनुभव किया जाएगा और इसके मूल्यांकन के लिए एक नियमित रूप से अनुरक्षित एवं अद्यतन ढ़ांचे की जरूरत होगी। विभिन्न अंतिम उपभोक्ताओं की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए, जलवैज्ञानिक सूचना प्रणाली घटक का विकास एक तार्किक प्रतिसाद है जिसमें डेटा बेस को पूरा करने के लिए एक डेटा प्राप्त करने तथा इसके भीतर निहित डेटा के विश्लेषण अवलोकन एवं मॉडलिंग के लिए डेटाबेस उपकरणों से युक्त एक डेटाबेस होता है।

सामान्य प्रयोक्ताओं द्वारा मृदा एवं जल मूल्यांकन उपकरण जलवैज्ञानिक मॉडलिंग पर आधारित जलवैज्ञानिक सूचना के अभिगम के लिए आर्कहाइड्रो डेटा मॉडल का इस्तेमाल करके एक भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) पोर्टल का विकास किया गया है। आर्कहाइड्रो डेटा मॉडल के माध्यम से जलसंभर को एकल भू-डेटाबेस में वर्णित करना संभव होता है जिसका इस्तेमाल भौगोलिक सूचना प्रणाली आधारित जलवैज्ञानिक द्रवचालित मॉडल द्वारा जलसंभरों के अनुरूपण हेतु किया जा सकता है। आर्कहाइड्रो, एक सामान्य डेटा भंडारण प्रणाली के माध्यम से अनुरूपण मॉडलों को जोड़ने के लिए साधन प्रदान करता है। इस प्रकार सतह जल के जलवैज्ञानिक तथा किसी भी पैमाने पर जल सर्वेक्षण मॉडलिंग में सहायता प्रदान करने के लिए एक ऐसी योजना तैयार की गई है जो कालिक एवं भू-स्थानिक जलवैज्ञानिक डेटा को प्रतिबिंबित करती है।

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