इंटरनेट और जलवायु परिवर्तन

समुद्री जल स्तर में वृद्धि से इंटरनेट सेवाएं हो सकती हैं बाधित

By: Staff Reporter
भूगोल और आप

इंटरनेट और जलवायु परिवर्तन :  जलवायु परिवर्तन से समुद्री जल स्तर में वृद्धि और कई नीचले द्वीपों के डूबने का पूर्वानुमान से हम सभी वाकिफ हो चुके हैं और आईपीसीसी सहित कई वैश्विक रिपोर्ट इसकी पुष्टि भी कर चुकी है। समुद्र से हजारों मील दूर रहते हुए, भले ही हम इस परिघटना के प्रत्यक्ष साक्षी नहीं बने परंतु डिजिटल माध्यम से हमें इसकी जानकारी जरूर मिल जाती है। पर वह दिन दूर नहीं जब हम इस डिजिटल माध्यम से जानकारी प्राप्त करने के स्रोत से भी महरूम हो सकते हैं। जी, हां यहां बात हो रही है इंटरनेट की। हाल के एक अध्ययन के अनुसार बढ़ते समुद्री जल स्तर से भविष्य में वैश्विक इंटरनेट सेवाएं बाधित हो सकती हैं और तब हम समुद्र से हजारों मील दूर रहते हुए भी जलवायु परिवर्तन जनित बढ़ते समुद्री जल स्तर के प्रभावों को महसूस कर सकते हैं।

अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉनसिन-मैडिसन एवं यूनिवर्सिटी ऑफ ओरेगॉन की 16 जुलाई, 2018 को प्रकाशित अध्ययन रिपोर्ट में इस बात को उद्घाटित की गई है। यह रिपोर्ट मॉण्ट्रियल में इंटरनेट नेटवर्क शोधकर्त्ताओं द्वारा प्रस्तुत की गई। इस अध्ययन रिपोर्ट को भारतीय मूल के रामकृष्णन दुराइराजन एवं कैरोल बार्फोड ने तैयार किया है जो कि इंटरनेट पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव का प्रथम आकलन भी है।

इस रिपोर्ट के मुताबिक संयुक्त राज्य अमेरिका के घने समुद्री तटों पर  इंटरनेट के अधिकांश ऑप्टिकल केबल बिछाए गए हैं जो बढ़ते समुद्री जल स्तर के कारण अगले 15 वर्षों में डूब जाएंगे। शोधकर्त्ता कैरोल बार्फोड के अनुसार जो खतरे अगले 100 वर्षों में आने थे वे जल्द ही आ सकते हैं। उनका यह भी कहना था कि अब तक यही माना जा रहा था कि इन ऑप्टिकल केबल, डाटा सेंटर, ट्राफिक एक्सचेंज, टर्मिनेशन प्वाइंट को बचाने के लिए 50 वर्षों का समय है परंतु किंतु अब ऐसा नहीं है।

अध्ययन रिपोर्ट का कहना है कि वर्ष 2033 तक 4000 मील से अधिक दूरी तक जमीन के नीचे दबे ऑप्टिकल केबल पानी के नीचे होंगे तथा 1100 से अधिक ट्राफिक हब चारों ओर से पानी से घिरा होगा। सर्वाधिक प्रभावित अमेरिकी शहर होंगे न्यूयार्क, मियामी एवं सिएटल। परंतु इसका प्रभाव केवल इन्हीं शहरों तक सीमित नहीं होगा परंतु वैश्विक जगत की इंटरनेट सेवाएं भी इसकी चपेट में आएंगे। पानी के नीचे के विशाल इंटरनेट केबल उत्तरी अमेरिका को शेष विश्व से जोड़ता है।  इसी कारण वैश्विक इंटरनेट सेवाओं के बाधित होने के आसार हैं। हालांकि बड़े ट्रांस-ओशेनिक केबल वाटरप्रूफ हैं परंतु अमेरिकी तटों पर जमीन के नीचे दबे छोटे केबल्स वाटरप्रूफ नहीं है जो चिंता का मुख्य कारण है। कई केबल्स के पास तो समुद्री जल स्तर पहले ही निकट पहुंच चुका है और ध्रुवीय बर्फों के पिघलने व तापीय वृद्धि से ये केबल्स समुद्री जल स्तर के और संपर्क में आ जाएंगे।

दरअसल आज से 25 वर्ष पहले सड़कों एवं समुद्री तटों पर जब अधिकांश इंटरनेट आधारसंरचनाएं बनाईं गईं तब इन पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के बारे में सोचा नहीं गया। लेकिन हाल में हरिकेन एवं तूफानों के पश्चात आई बाढ़ ने भविष्य में आने वाली चुनौतियों से लोगों को आगाह जरूर कर दिया है। हालांकि इससे बचने के लिए मजबूत समुद्री दीवारें जरूर बनाई जा रही हैं और इनसे इंटरनेट केबल को बचाया भी जा सकता है परंतु यह नाकाफी साबित हो सकता है।

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