सीएसआईआर ने विकसित की कांगड़ा चाय की उन्नत किस्म

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सीएसआईआर-आईएचबीटी (हिमालय जैव संपदा प्रौद्योगिकी संस्थान) पर्वतीय क्षेत्र की पादप व पुष्प प्रजातियों की उन्नत किस्मों के संवर्धन में अपना विशिष्ट योगदान कर रहा है। इसी क्रम में सीएसआईआर-आईएचबीटी ने हिमाचल प्रदेश की कांगड़ा घाटी में उगने वाली कांगड़ा चाय की उन्नत प्रजाति विकसित की है। कांगड़ा चाय हिमालय क्षेत्र की धौलाधर पर्वतमाला की तलहटियों में सन् 1850 से उगाई जा रही है, जो अपने विशिष्ट स्वाद व सुगंध के लिए मशहूर है। इसमें उपस्थित प्रमुख यौगिक तत्व हैं – नोनानल, हेक्सानल, लिनालूल, लिनालूल ऑक्साइड, गेरानिऑल, मेथाइल सैलिक्सीलेट, बीटा-आईओनोन और पायरेजिनेस।

चाय की गुणवत्ता उनके बागानों में निर्धारित होती है। गुणवत्ता का निर्धारण बागान में उगे पौधों से तोड़ी जाने वाली कोंपलों के आकार और उनके रासायनिक संयोजन तथा सक्रिय पत्तियों की संख्या से होता है। इसमें बागान की फसल का प्रबन्धन, फसल के बाद पत्तियों का भंडारण और कारखानों तक इसका परिवहन महत्वपूर्ण होता है।

हिमाचल प्रदेश की कांगड़ा घाटी में उगने वाले कांगड़ा चाय के पौधे चाइना हाइब्रिड प्रजाति के हैं। इन पौधों के बहुसंख्यक तनों में लगी कोंपलें आकार में छोटी होती हैं और इनमें सुरभि तत्व प्रचुर मात्रा में होते हैं। बिना कांट-छांट वाली परिस्थितियों में कोंपलों का आकार छोटा होता है और निष्क्रीय कोंपलों और फूलों की संख्या बढ़ती जाती है। छायादार वृक्ष गुणवत्ता युक्त कोंपलों के उत्पादन में सहायक होते हैं।

सीएसआईआर-हिमालय जैव संपदा प्रौद्योगिकी संस्थान, पालमपुर, हिमाचल प्रदेश ने चाइना हाइब्रिड प्रजाति की चाइना संकर चाय कैमेलिया सिनोसिस (सीएसआईआर-आईएचबीटी-टी-01) कांगड़ा चाय का विकास ’हिमस्फूर्ति’ किस्म नाम से किया है जो शीघ्र वृद्धि वाली है।

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