ग्रीष्म ऋतु में हीट वेव लेकिन तापमान में कमी रहेगी

भारतीय मौसम विभाग द्वारा 1 अप्रैल, 2018 को जारी ‘ऋतुनिष्ठ दृष्टिकोण‘ के अनुसार अप्रैल-जून 2018 के महीनों में देश के अधिकांश हिस्सों में तापमान ‘औसत से ऊपर’ रहेगा।’ आईएमडी आलोच्य अवधि अप्रैल-जून को वास्तविक ग्रीष्म ऋतु मानता है। ‘औसत से ऊपर’ तापमान की स्थिति का मतलब है कई जगह हीट वेव की स्थिति भी रहेगी। […]

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सीएसआईआर ने विकसित की कांगड़ा चाय की उन्नत किस्म

सीएसआईआर-आईएचबीटी (हिमालय जैव संपदा प्रौद्योगिकी संस्थान) पर्वतीय क्षेत्र की पादप व पुष्प प्रजातियों की उन्नत किस्मों के संवर्धन में अपना विशिष्ट योगदान कर रहा है। इसी क्रम में सीएसआईआर-आईएचबीटी ने हिमाचल प्रदेश की कांगड़ा घाटी में उगने वाली कांगड़ा चाय की उन्नत प्रजाति विकसित की है। कांगड़ा चाय हिमालय क्षेत्र की धौलाधर पर्वतमाला की तलहटियों […]

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गहरी खाइयों से कटा हुआ है समुद्र तल

1930 के दशक के उत्तरार्द्ध से समुद्री भूगर्भशास्त्र में नई तकनीकों का सूत्रपात हो चुका है। गुरूत्व मापन और बिंबयोजना के कारण समुद्र की सतह और तली संरचना का सही-सही मापन संभव हुआ है। समुद्र तल भारी पर्वत श्रृंखलाओं, मध्य-सागरीय पर्वत मालाओं से घिरा हुआ है जो वैश्विक नेटवर्क का निर्माण करता है और वह […]

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बांस से कोयला बनाना एक नया रोजगार

भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले अपने व्यवसाय के रूप में मूलरूप से कृषि का चयन करते हैं। उनके लिए दूसरा उत्तम रोजगार पशुपालन के रूप में दिखता है। कृषि-मौसमों रबी, खरीफ, जायद के अलावा वर्ष का जो समय शेष बचता है उनमें वे अपने लिए कोई वैकल्पिक रोजगार ढूंढते हैं। वैज्ञानिक अनुसंधानों के […]

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हिम का ढलान की ओर तीव्र प्रवाह है हिमधाव

हिमनद क्षेत्र में बर्फ की नदियां होती हैं, जो निरंतर गतिमान रहती हैं तथा जिनका निर्माण सैकड़ों या हजारों वर्षों के दौरान हिम के संहनन और पुनः रवाकरण द्वारा होता है। प्रवाहपूर्ण संचलन चाहे वह कुछेक सेंटीमीटर या दस मीटर प्रतिदिन क्यों न हो, एक हिमनद को मृत बर्फ के ढेर से अलग करता है। […]

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फसल के लिए नाइट्रेट की आवश्यकता

पादपों की जड़ों द्वारा अवशोषित नाइट्रेट बड़े कार्बनिक अणुओं में शामिल हो जाते हैं जो कि जानवरों द्वारा खाए जाने पर उनमें अन्तरित हो जाते हैं। जिन पादपों का राइजोबियम के साथ पारस्परिक संबंध होता है, उनमें से कुछ नाइट्रोजन गांठों से प्राप्त अमोनियम आयनों के रूप में आत्मसात हो जाता है। हालांकि, सभी पादप […]

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भूजल का संरक्षण और जलभरों का बचाव

विभिन्न स्तरों पर भूजल की मात्रा व गुणवत्ता के संरक्षण की आवश्यकता है। इसके लिए भूजल के दोहन की सीमा, वर्तमान जलभरों को रिचार्ज करना, खारा जल प्रवेश, प्रदूषित सीवेज और औद्योगिक कचरों द्वारा हो रहे प्रदूषित जल को रोकने की आवश्यकता है। यह निश्चित है कि शहरी आबादी की आवश्यकता पूर्ति हेतु जल की […]

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कवकधारी मछली की प्राप्ति का क्षेत्र व उपयोग संभाव्यता

कवकधारी मछली अथवा प्रकाशवान मछलियां मेसोपेलॉजिक मछलियों का समूह हैं जो मध्य, पश्चिमी और उत्तरी अरब सागर में प्रचुरता से तथा भारतीय अनन्य आर्थिक क्षेत्र में मध्यम प्रचुरता में पाई जाती हैं। वर्ष 2007-12 के दौरान किए गए सजीव समुद्री संसाधन सर्वेक्षणों के फलस्वरूप भारतीय अनन्य आर्थिक क्षेत्र में कवकधारी मछली की संसाधन उपलब्धता को […]

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भारतीय महासागर में कार्बन डाईऑक्साइड की उपस्थिति

भारतीय महासागर की पहचान वायुमण्डलीय कार्बन डाईऑक्साइड के लिए एक नेट सिंक के रूप में की गई है। घुलनशीलता द्वारा यह प्रति वर्ष लगभग 330-430 टेट्राग्राम कार्बन उदग्रहित करता है जो कार्बन डाईऑक्साइड के वैश्विक महासागरीय उदग्रहण का लगभग 20 प्रतिशत है। वायु से समुद्र में कार्बन डाइऑक्साइड के इस प्रवाह का अधिकांश हिस्सा तापमान […]

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