जैव विविधता को संरक्षित करें और पृथ्वी को बचाएं

भूगोल और आप

जैव विविधता से आशय जीव जंतुओं, वनस्पतियों, सूक्ष्म जैविकों, पर्यावरण और हम सभी मानवों से है। इसका संबंध पृथ्वी के जैविक और अजैविक दोनों संघटकों से है। जब तक इन सभी संघटकों का सह अस्तित्व बना रहेगाए इनके बीच सामंजस्य और संतुलन कायम रहेगा जिससे अन्ततः पृथ्वी रहने योग्य बनी रहेगी। जैव विविधता का महत्व साधारणत: इस आधार पर आंका जा सकता है कि यह हम सबकी उत्तर जीविता के लिए सभी कुछ (भोजन, ईंधन, औषधि, आश्रय आदि) उपलब्ध कराती है। इसके संतुलन में किसी प्रकार की गड़बड़ी से सभी जैविक संघटक प्रभावित होंगे और इस प्रकार हमें अपनी उत्तर जीविता के साथ समझौते करने पड़ेंगे। जैव विविधता बहुत महत्वपूर्ण है और उसे संरक्षित किए जाने की जरूरत है।

वर्तमान में, जैव विविधता लाखों जैविक प्रजातियों जिनका विकास गत चार अरब वर्षों से अधिक समय से होता रहा हैए से मिलकर बनी है। इसलिए जैव विविधता का प्रभावित होना दुर्भाग्य की बात होगी। एक सामान्य आकलन यह है कि प्रतिवर्ष 200 से 2000 प्रजातियां विलुप्त हो रही हैंए जिसका मोटे तौर पर यह अर्थ हुआ कि प्रतिदिन 1 से 5 प्रजातियां विलुप्त हो रही हैं। जैव विविधता के नुकसान का कारण निश्चित तौर पर हम लोग यानी मानव जाति हैं। वर्षों से हम लोगों ने अपने वैयक्तिक जरूरतों को पूरा करने हेतु और शहरीकरण के कारण अपने अधिवासों को नष्ट किया है धन और समृद्धि के अपने लालच को पूरा करने हेतु जीव-जंतुओं और पेड़-पौधों के किए गए अतार्किक और अनियोजित विनाश के कारण अन्ततः हम ऐसे मुकाम पर पहुँच जाएंगे जहां से स्थिति को पुन: नियंत्रित कर पाना असंभव होगा। ऐसा कोई सोच भी नहीं सकता है कि ग्रेट बंगाल टाईगर, एशियाई शेर, चीते, एक सिंगागैंडे जैसे आकर्षक जानवरों और बाघ, गिरगिट, नाग-सांप जैसी कई अन्य प्रजातियों को उनके प्राकृतिक सौन्दर्य, कवचीय और चिकित्सीय गुणों के लिए चुन-चुन कर मारा गया है और बाजार में बेचा गया है। यह अनुमान है कि जानवरों के अंगों की बिक्री औषधियों के अवैध व्यापार के समतुल्य है। अतिवादी मामलों मेंए इस सबके कारण कई जानवर विलुप्त हो चुके हैं इसलिए, केवल व्यक्तियों से ही नहीं बल्कि देशों और संबंधित सरकारों की ओर से भी जैव विविधता को नुकसान पहुंचाए जाने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने हेतु प्रतिबद्धता दिखाने की जरूरत है।

अज्ञात चिकित्सीय गतिविधियों के लिए विजातीय फूलों, जड़ों और फलों की वाणिज्यिक गतिविधियों पर स्मारिकाओंए स्थितियों को दर्शाने वाले प्रतीकों आदि के माध्यम से रोक लगाई जानी चाहिए। यह बात सुकून पहुंचाने वाली है कि कई देशों की सरकारें और अन्तर्राष्ट्रीय संगठन जैव विविधता को संरक्षित करने में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। वैश्विक ताप वृद्धि पर अंकुश लगाने के लिए किया जा रहा प्रयास सराहनीय है। जैव विविधता के बारे में जब हम बात करते हैं तो आमतौर पर उन जीव.जंतुओं और पेड़-पौधों जो हमें दिखाई देते हैंए पर ही जोर देने की प्रवृत्ति होती है। लेकिन पर्यावरण में निरंतर सक्रिय रहने वाले सू़क्ष्म जीवो को पूरी तरह भुला दिया जाता है। पर्यावरण के ये अदृश्य भागीदार अन्ततः पेड़-पौधों को संसाधन उपलब्ध कराते हैं और इस प्रकार से अधिवास और जीव.जंतुओं पर अप्रत्यक्ष प्रभाव डालते हैं। ये सूक्ष्मजीवी कई प्रकार से हमें फायदा पहुँचाते हैं और कृषि तथा दवा के मामले में उनका अत्यधिक प्रभाव पड़ता है।

जैविक विविधता संबंधी अभिसमय में “वैश्विक जैव विविधता दृष्टिकोण” के प्रतिवेदन के रूप में जैव विविधता के महत्व को यह कहते हुए बड़े ही सटीक ढंग से दर्शाया गया है:- “जैव विविधता को हो रहे निरंतर नुकसान को गरीबी से निपटने, स्वास्थ्य में सुधार करने, समृद्धि और वर्तमान तथा भावी पीढ़ी की सुरक्षा एवं अपनी पारिस्थितिकी प्रणालियों को दुरूस्त करने जैसे समाज के प्रमुख चिंताओं से अलग मुद्दों के रूप में हम और नहीं देख सकते। हमारी पारिस्थितिकी प्रणालियों के मामले में मौजूद प्रवृत्तियों के कारण इनमें से प्रत्येक उद्देश्य का महत्व घट जाता है और यदि हम अन्तिम रूप से जैव विविधता को समुचित प्राथमिकता देने लगेंगे तो उनमें से प्रत्येक उद्देश्य को काफी मजबूती मिलेगी।”

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