सात अरब वर्ष पुराना स्टारडस्ट-पृथ्वी पर प्राचीनतम ठोस सामग्री

वैज्ञानिकों ने आज से 50 वर्ष पहले आस्ट्रेलिया में गिरे उल्कापिंड में ऐसा स्टारडस्ट खोजा  है जिसका निर्माण आज से 5 से 7 अरब वर्ष पहले हुआ था। इस तरह यह पृथ्वी पर प्राप्त होने वाला अब तक का प्राचीनतम ठोस सामग्री है। ‘प्रोसिडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज’ में प्रकाशित शोध आलेख, जिसके […]

Continue Reading
भू-आकृति विज्ञान

भू-आकृति विज्ञान अर्थात भौगोलिक संरचनाओं का अध्ययन

भौगोलिक परिवर्तनों के कारण पृथ्वी की सतह पर निर्मित होने वाली विभिन्न प्रकार की आकृतियों, इनकी संरचना के लिए होने वाली विभिन्न प्रकियाओं, उच्चावच तथा स्थलीय स्वरूपों की स्थापना सम्बन्धी कारणों का अध्ययन भू-आकृति विज्ञान के अंतर्गत किया जाता है। इसकी उपयोगिता भूगोल, पुरातत्व विज्ञान, भू-अभियांत्रिकी विज्ञान, तकनीकी भू-अभियांत्रिकी, भू-ज्यामिति आदि विषय क्षेत्रों में है। […]

Continue Reading
चक्रवात की उत्पत्ति

उष्ण कटिबंधीय चक्रवात की उत्पत्ति के पूर्वानुमान

उष्ण कटिबंधीय चक्रवात की उत्पत्ति संबंधी आपदाओं का अपचयन, जोखिम विश्लेषण, सुभेद्यता विश्लेषण, तैयारी एवं आयोजना, पूर्व चेतावनी, रोकथाम एवं उपशमन सहित अनेक कारकों पर निर्भर करता है। दक्षिण एशिया की सामाजिक आर्थिक परिस्थितियों के कारण पूर्व चेतावनी इसके लिए एक प्रमुख घटक है। पूर्व चेतावनी घटक में चक्रवात मानीटरन एवं पूर्वानुमान में कौशल, प्रभावी […]

Continue Reading
मानचित्रण की कला

मानचित्रण की कला एवं इसकी उपयोगिता

भौगोलिक विशेषताओं से युक्त किसी स्थान की आकारिकी, अक्षांश व देशान्तरीय विस्तार के अनुसार स्थिति, इससे सम्बद्ध भौगोलिक आकृतियों यथा – पर्वतों, नदियों आदि का मापन व निर्धारण मानचित्रण कहलाता है। वर्तमान काल में देशों-प्रदेशों तथा उनके अंदर स्थित विभिन्न भौगोलिक संरचनाओं वन प्रदेशों, तटीय भूमि, जल संसाधन क्षेत्रों, खनिज संसाधन क्षेत्रों, कृषि भूमि, जलवायु, […]

Continue Reading
मुख्य जलवायु प्रदेश

कोपेन द्वारा वर्गीकृत भारत के मुख्य जलवायु प्रदेश

Amw – यह उष्ण कटिबंधीय (मानसूनी) आर्द्र मुख्य जलवायु प्रदेश है जिसमें सबसे ठण्डे माह का तापमान 18 डीग्री सेंटीग्रेड से ऊपर रहता है तथा इसमें लघु शुष्क ऋतु भी होती है। ऐसी जलवायु भारत में कांकण एवं मालाबार तटवर्ती क्षेत्रों में पायी जाती है जिनमें गोवा दक्षिणी पश्चिमी महाराष्ट्र, पश्चिमी कर्नाटक, केरल तथा कन्याकुमारी […]

Continue Reading
जलवायु परिवर्तन के प्रभाव

जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से कृषि पर मंडराता खतरा

वैज्ञानिकों ने जलवायु परिवर्तन के कृषि उत्पादनों पर प्रतिकूल प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए स्पष्ट किया है कि इसके कारण न केवल जल स्रोत सूख जायेंगे अपितु शीतोष्ण व समशीतोष्ण क्षेत्रों में अधिकांश उपजाऊ भूमि में बढ़ते तापमान के कारण दरारें पड़ जायेगी। यही नहीं, चावल व मक्का की उपज की मात्रा वर्तमान की तुलना […]

Continue Reading

जैव विविधता में महत्वपूर्ण हैं मूंगे की चट्टानें

मूंगे की चट्टानें उष्ण कटिबन्ध में पायी जाने वाली सबसे जटिल और रंग-बिरंगी पारिस्थितिकीय प्रणाली है। जहाँ तक जीव-जन्तुओं की उपस्थिति का सवाल है इनमें जैसी जैव विविधता पायी जाती है वैसी वर्षा वनों के अलावा और कहीं देखने को नहीं मिलती। मूंगे की चट्टानें में पाये जाने वाले जीवधारी ऐसी विशाल और जटिल भौतिक […]

Continue Reading

प्रवालभित्ति विरेचन की घटनाएं बढ़ना चिंताजनक

समुद्री सतह के तापमान बढ़ने, सौर्य विकिरण, गाद जमा होने, जेनोबाइटिक्स, उपवायव (सबएरियल) प्रकटीकरण, अकार्बनिक पोषक तत्वों, मीठे जल के सम्पर्क के कारण जल की सान्द्रता कम होने, एपिजूटिक्स सहित प्रवाल पर्यावरण में मानव जनित और प्राकृतिक परिवर्तनों के कारण प्रवालभित्ति का विरेचन होता है। विगत 30 वर्षों के दौरान प्रवाल विरेचन की घटना  में […]

Continue Reading
Harvey

भारतीय महासागर के ऊपर चक्रवात निर्माण की दशा

उष्ण कटिबंधीय चक्रवात निम्न दबाव के ऐसे गहन सिस्टम होते हैं जहाँ सतह संचरण सिस्टम में पवन गति 33 नॉटिकल मील प्रति घंटे से अधिक हो जाती है। उत्तर भारतीय महासागर के ऊपर निम्न दबाव के सिस्टमों को सतह स्तर पर उनसे जुड़ी अधिकतम सतत सतह पवन के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। दबाव […]

Continue Reading
CP of Delhi

पेरू एवं बूदेविए द्वारा वृद्धि ध्रुव मॉडल

द्वितीय विश्वयुद्ध के उपरान्त 60 एवं 70 के दशक में विश्व की विकसितए विकासशील एवं अविकसित अर्थव्यवस्थाओं में असमानताओं को प्रस्तुत करने के लिए अर्थशास्त्रियों एवं भूगोलवेत्ताओं ने अनेक प्रादेशिक विकास मॉडल प्रस्तुत किये। ये प्रस्तुत मॉडल निर्यात आधारितए आगम-निर्गम तथा वृद्धि धु्रव उपागम पर आधारित हैं। जिसमें से पेरू एवं बूदेविए के द्वारा प्रस्तुत […]

Continue Reading