कपास की खेती

विविध प्रकार से लाभदायक है कपास की खेती

कपास विश्व की सबसे प्रमुख, प्राचीन तथा व्यावसायिक रेशेदार फसल है। भारत में कपास का उपयोग 1800 बी. सी. से किया जा रहा है। कपास की खेती सूती वस्त्र उद्योग का आधार है। वनस्पति, पशु-चर्म तथा कृत्रिम रेशे से तैयार कुल वस्त्रों का आधा से अधिक भाग कपास के रेशे से तैयार किया जाता है। […]

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पशु-धन क्षेत्र पर जलवायु परिवर्तन के संभावित प्रभाव

ग्लोबल जलवायु परिवर्तन के कारण वैश्विक तापमान में 2 से 6 डिग्री सैल्सियस की वृद्धि से (समयकाल 2040-2069 तथा 2070-2099) संकर पशुओं तथा भैंसों में देशी पशु-धन की तुलना में अपनी उच्च संवेदनशीलता के कारण यौवनारंभ का समय एक या दो सप्ताह तक आगे बढ़ जाएगा। वैश्विक गर्मी के कारण वर्ष 2020 तक दूध उत्पादन […]

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तटवर्ती भूमि

तटवर्ती भूमि पर समुद्री जल वृद्धि से पड़ने वाले प्रभाव

खुले समुद्र में या भूमि के ऊपर उत्पन्न होने वाली प्रक्रियाओं से तटरेखा प्रभावित होती है। तटरेखा पर जलवायु संबंधी प्रभावों के दृष्टिगतए निम्नलिखित स्थितियां बड़ी ही चिंताजनक हैं : महासागरों के तापमान बढ़ने तथा हिमनदों के पिघलने के कारण दीर्घावधि तक समुद्र के जलस्तर में वृद्धि होना। इससे जल प्लावन तो होगा ही जिससे […]

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जल मार्ग

जल मार्ग आकृतिक विज्ञान से जलधारा का ज्ञान होना

‘जल मार्ग’ अंग्रेजी शब्द ‘चैनल’ का हिन्दी रूपान्तरण है जिसका तात्पर्य यह है कि किसी प्राकृतिक जल स्रोत का वह भाग जहाँ से परिवहन का कार्य सम्पादित होता हो। लेकिन जल मार्ग का व्यवहारिक सम्बन्ध नदी मार्ग से है। वस्तुतः नदी का सर्वाधिक गहरा भाग जिससे होकर नदी की मुख्य धारा प्रवाहित होती है उसे […]

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मुम्बई में बारिश से आफत में जिन्दगी

मुम्बई में बारिश ने लोगों का बुरा हाल कर दिया। सोमवार, 28 अगस्त 2017 की सुबह शुरू हुई बारिश आज बुधवार, 30 अगस्त तक जारी है। मंगलवार, 29 अगस्त का दिन बारिश के भीषण कहर वाला रहा। इस दिन सुबह 8.30 से रात 9 बजे तक मुम्बई में बारिश होती रही और कोई न कोई […]

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तट रेखा प्रबंधन

तट रेखा प्रबंधन तथा मानचित्रण कार्य का निर्धारण

केरल के निकट तट रेखा प्रबंधन योजना प्राकृतिक विषम स्थितियों के कारण और तट  रेखा के साथ.साथ मानव द्वारा बनाई गई संरचनाओं से तटीय प्रक्रियाओं में परिवर्तन होने के कारण केरल के तटीय क्षेत्रों में अत्यधिक भू-कटाव हो रहा है। भू-कटाव के प्रेरक कारणों को समझने के लिए मुथलापोजी ज्वारीय मुहाने के किनारे के तटीय […]

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संख्यात्मक मॉडलिंग

सुन्दरवन पारिप्रणाली के लिए संख्यात्मक मॉडलिंग

तट रेखा प्रबंधन के अंतर्गत इस परियोजना का उद्देश्य सुन्दरवन पारिप्रणाली को समझने के लिए आधार रेखा संबंधी सूचना एकत्र करना था। सुन्दरवन डेल्टा में कोलकाता से करीब 130 किमी की दूरी पर स्थित लगभग 20 वर्ग किमीण् क्षेत्र में एक छोटी सी जगह झरखाली के निकट प्राकृतिक संकरी नदी प्रणाली में एक प्रायोगिक परियोजना […]

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भारतीय नगरों की आंतरिक संरचना और वर्गीकरण

नगर वह अधिवासीय क्षेत्र है जहाँ कार्यिक विविधता और गहनता के साथ ही कार्यिक विशेषीकरण पाया जाता है। नगर की कार्यिक जनसंख्या गैर प्राथमिक कार्यों में संलग्न होती है लेकिन विभिन्न प्रकार के आर्थिक कार्यों के अनुरूप विशेष कार्यिक खण्डों का विकास होता है। पुनः आर्थिक आधार पर विभिन्न आय वर्गों के अधिवासीय खण्ड भी […]

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समुद्री पर्यावरण में तेल रिसाव प्रबंधन

विश्व भर में तेल की भारी मात्रा का परिवहन समुद्री मार्ग से होता है। भारत में कच्चे तेल की मांग का 70 प्रतिशत समुद्री मार्ग से आयात हो रहा है। उसी प्रकार से दक्षिण-पूर्व एशियाए पूर्वी एशिया, जापान और चीन पश्चिमी एशिया से तेल के आयात पर प्रमुख रूप से निर्भर हैं और यह आयात […]

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अनुबन्ध खेती

अनुबन्ध खेती के लाभ व विशेषतायें

राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार देश के 40 प्रतिशत किसान खेती छोड़ना चाहते हैं। लेकिन वैकल्पिक रोजगार के अभाव में वे इससे चिपके हुए हैं। जबकि कृषि आधारित उत्पाद बनाने वाली फर्में लगातार अपनी गुणवत्ता में सुधार की ओर अग्रसर हैं।  हमारी कृषि व्यवस्था में उत्तम बीज एवं उर्वरक, बुवाई एवं […]

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