जशपुर नगर

पर्यटन का रमणीय स्थल है छत्तीसगढ़ का जशपुर नगर

भूगोल और आप

छत्तीसगढ़ छः राज्यों से घिरा हुआ है। इसके उत्तरी भाग में उत्तर प्रदेश, पूर्वोत्तर भाग में झारखंड, दक्षिणी भाग में उड़ीसा और आन्ध्र प्रदेश, दक्षिणी-पश्चिमी भाग में महाराष्ट्र और उत्तर-पश्चिम भाग में मध्य प्रदेश है। छत्तीसगढ़ में 27 जिले हैं। छत्तीसगढ़ मुख्य रूप से एक ग्रामीण राज्य है जहां केवल 20 प्रतिशत जनसंख्या शहरी क्षेत्रों में रह रही है।

छत्तीसगढ़ देश के मध्य-पूर्वी भाग में स्थित है। राज्य के उत्तरी और दक्षिण भाग में पहाड़ियां मौजूद हैं जबकि मध्य भाग एक उपजाऊ मैदान है। राज्य के लगभग 44 प्रतिशत भाग में वन हैं। राज्य का उत्तरी भाग विस्तृत गंगा मैदान के किनारे पर अवस्थित है। रिहंद नदी, जो कि गंगा की एक सहायक नदी है, इस क्षेत्र को सिंचित करती है। सतपुड़ा श्रृंखला का पूर्वी छोर और छोटा नागपुर पठार का पश्चिमी छोर पहाड़ियों के पूरब-पश्चिम क्षेत्र का निर्माण करते हैं जोकि महानदी बेसिन को भारत-गंगा मैदान से अलग करता है। राज्य का मध्य भाग महानदी के उपजाऊ ऊपरी बेसिन में स्थित है और इसकी सहायक नदियां राज्य में धान की गहन खेती में, सहायता प्रदान करती हैं। महानदी बेसिन को पश्चिम में मैक्कल पहाड़ियां (सतपुड़ा के भाग) ऊपरी नर्मदा बेसिन से अलग करती हैं और पूरब में पहाड़ियों की श्रृंखला उड़ीसा के मैदानी भागों से अलग करती हैं।

राज्य का दक्षिणी भाग गोदावरी नदी के जलग्रहण क्षेत्र और इंद्रावती नदी की सहायक नदी तथा डेक्कन पठार पर स्थित है। महानदी राज्य की मुख्य नदी है। हसदो (महानदी की सहायक नदी), रिहंद, इंद्रावती, जोंक और अरपा अन्य मुख्य नदियां है। भारत का 12 प्रतिशत वन छत्तीसगढ़ में है और राज्य की 44 प्रतिशत भूमि में वन मौजूद हैं। हरित राज्य छत्तीसगढ़ की पहचान एक समृद्ध जैव-विविधता वाले अधिवासों के रूप में है जहाँ भारत के सघन वन और बड़ी संख्या में वन्य-जीव मौजूद हैं और सबसे बड़ी बात 200 से अधिक गैर इमारती उत्पाद हैं जिनके मूल्यवर्धन की अपार संभावना है। छत्तीसगढ़ की एक-तिहाई जनसंख्या आदिवासियों की है जो उत्तरी और दक्षिण क्षेत्रों में अवस्थित सघन वन क्षेत्रों में रहती है।

छत्तीसगढ़ के प्राचीन स्मारक – छत्तीसगढ़ राज्य प्राचीन स्मारकों, दुर्लभ वन्य जीवों, भव्य मंदिरों, बौद्ध स्थलों, राज महलों, जल प्रपातों, गुफाओं, चट्टानी भीत चित्रों और पर्वतीय पठारों से भरा पड़ा है। इनमें से अधिकतर स्थल अछूते पड़े हैं तथा पर्यटन की संभावना नहीं तलाशी गई है। पारंपरिक स्थानों जहाँ काफी भीड़-भाड़ होती है कि तुलना में यह राज्य पर्यटकों के लिए एक अनूठा और वैकल्पिक अनुभव प्रदान करता है। छत्तीसगढ़ पर्यटकों के लिए एक अलग प्रकार का पर्यटन स्थल उपलब्ध कराता है। इसमें मौजूद देश का 12 प्रतिशत वन क्षेत्र, 36 राष्ट्रीय पार्क और 11 वन्य-जीव अभ्यारण आकर्षण के प्रमुख केन्द्र हैं। राज्य द्वारा तीर्थ स्थलों के विकास को प्रोत्साहित किया गया है। राजीन, चंपारण, डोंगरगढ़, शिवडीनारायण, गिरोधपुरी, दंतेवाड़ा, रतनपुर, सिरपुर और अन्य तीर्थ स्थल पर्यटन हेतु प्रमुख स्थान हैं। सिरपुर और डोंगरगढ़ विस्तृत बौद्ध पर्यटन क्षेत्र का भाग बनने जा रहे हैं।

जशपुर नगर: छत्तीसगढ़  राज्य के उत्तरी भाग में जशपुर नगर  स्थित है जो कि सप्ताहांत मनाने के लिए एकदम सही स्थान है। उरांव जनजातिय जनसंख्या और उनकी छोटी-छोटी बस्तियां जशपुर नगर के लिए एक अलग आकर्षण के केन्द्र हैं। इन आदिवासियों के अपने स्वयं के लोकगीत और परंपराएं हैं। वहां चांदनी रात को आदिवासी नृत्य देखने के  आनंद से बढ़कर कुछ भी नहीं है। जशपुर नगर के ऊपरी घाट पहाड़ियों और जंगलों से भरे पड़े हैं जबकि निचले क्षेत्र में विशाल नदियां और झरने मौजूद हैं। नदियां, गुफाएं और झरने जशपुर नगर में निशानेबाजी, ट्रेकिंग और लंबी पैदल यात्रा जैसे कार्यक्रम बनाने का पर्याप्त अवसर प्रदान करते हैं। इसके रास्ते समतल नहीं हैं क्योंकि कुछेक स्थानों पर अभी भी सड़क निर्माण की प्रक्रिया चल रही है। फिर भी वहां से होकर यात्रा करना रोमांचक है। राजपुरी में प्रकृति के विभिन्न पहलुओं के दर्शन होते हैं।

राजपुरी झरना जशपुर नगर के उन स्थानों में से एक है, जहां काफी संख्या में लोगों का आना-जाना लगा रहता है। यह एक लोकप्रिय पिकनिक स्थल भी है। इस स्थल के आस-पास के आदिवासी गांव पूरे स्थल में एक अलग किस्म का आकर्षण पैदा करते हैं। यहां की सुन्दरता कुछ अजीब सा रहस्य लिए है। यहां काफी कम संख्या में पर्यटक आते हैं। अगल-बगल मौजूद चट्टानी दीवारें प्रागैतिहासिक काल की लगती हैं और यह एक प्राचीन गाथा को समेटे हुए दिखती हैं। जशपुर नगर के अन्य बहुत सारे स्थानों की भांति इस स्थान की भी एक अलग कहानी है और एक लोकप्रिय लोकगीत उसकी पुष्टि करता है। यह स्थान मुख्य जशपुर नगर से 60 किलोमीटर दूर है। राजपुरी झरने में मछली मारने की भी पर्याप्त संभावना मौजूद है। यह जशपुर मुख्यालय से 90 किलोमीटर दूर बगीचा के पास में अवस्थित है।

कुनकुरी : यहाँ स्थित महागिरिजाघर (कैथेड्रल) का एशिया में दूसरा स्थान है। यह स्थान न तो किसी चर्च समिति द्वारा दिया गया है और न ही सम्मानित पोप के द्वारा। ईसाई विरोधी समूह द्वारा एशिया में दूसरा स्थान प्रदान किया गया है। इसकी स्थापना 1962 में स्वर्गीय रिवरेंड बिशप स्टैन्लस टिग्गा के काल में हुई। एफआर. जे.एम. कारसी ने इसका नक्शा तैयार किया था। बीआर. जोसेफ टोपो ने आइटोन्स द्वारा इसका निर्माण शुरू कराया। उसकी मृत्यु के बाद एफआर. मैनुस्टेन एस.जे. ने स्वर्गीय रिवरेंड बिशप फ्रान्सिस इक्का के काल में इसके निर्माण को पूरा कराया। 27 अक्तूबर, 1979 को इसका उद्घाटन किया गया। इस गिरिजाघर में मेहराब के आकार में 7 दरवाजे बने हुए हैं और लोहे के 7 पवित्रता के प्रतीक बनाए गए हैं। इस गिरिजाघर भवन के बिल्कुल सामने बना एक अति सुन्दर धार्मिक स्थल सैलानियों को मदर मैरी की प्रार्थना करने के लिए आमंत्रित करता है। सभी धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति यहां प्रतिदिन इस गिरिजाघर और इस धार्मिक स्थल में आते हैं। वे सभी लोग जीसस और मदर मैरी के समक्ष घुटने टेक कर प्रार्थना करते हैं।

गिरिजाघर में 5,000 लोगों के बैठने की क्षमता है। जाति और धर्म से परे, श्रद्धालु बड़ी संख्या में यहाँ आते हैं।

महागिरिजाघर जशपुर नगर से लगभग 40 किलोमीटर और राष्ट्रीय राजमार्ग 78 से 20 किलोमीटर दूर कुनकुरी में स्थित है।

कैलाश गुफा : छत्तीसगढ़, के उत्तरी भाग में अवस्थित जशपुर नगर प्रकृति प्रेमियों के लिए वास्तव में एक स्वर्ग समान है। पूरे क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधन और जनजातिय जनसंख्या बड़ी संख्या में मौजूद है। उरांव जनजाति के लोग इस स्थान के मुख्य निवासी हैं। मिशनरियों का यहां आगमन होने के साथ, बड़ी संख्या में उरांव  लोगों ने ईसाई धर्म को अपना लिया है और उन मिशनरियों ने इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में मिशनरी स्कूल भी खोले हैं। जशपुर नगर में साक्षरता दर बढ़ाने की प्रक्रिया शेष छत्तीसगढ़ की तुलना में अधिक तेजी से चल रही है। जशपुर नगर में पर्यटकों के आकर्षण के केन्द्र बहुत हैं जो कि प्रकृति प्रेमियों और साहसिक यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए भी आकर्षण के केन्द्र हैं। जशपुर नगर में स्थित नदियां, गुफाएं और जल प्रपात ट्रेकिंग करने वालों और हाइकर्सों के लिए पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराते हैं। सबसे बड़ी बात, यदि आप प्रकृति की तस्वीर खींचने का शौक रखते हैं तो इन स्थानों पर आपका कैमरा हमेशा ही ऑन रहेगा।

कैलाश गुफा जशपुर नगर का वह स्थान है जिसमें लोग बार-बार आते रहते हैं। कैलाश गुफा कांगर घाटी राष्ट्रीय पार्क के घने जंगल में स्थित है। गुफा प्रागैतिहासिक काल की प्रतीत होती है जिसमें अंधेरा व्याप्त है और एक संकीर्ण प्रवेश द्वार बना हुआ है। एक 100 मीटर लम्बी गुफा पहाड़ी में अवस्थित है और यह वर्ष 1993 में लोगों की नजर में आयी। स्टलाक्टाइट और स्टलाक्माइट से निर्मित पत्तियां इस प्राचीन गुफा की मुख्य विशेषता हैं। यहां भू-गर्भशास्त्रियों के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं। इसे कैलाश गुफा के नाम से जाना जाता है क्योंकि एक प्राकृतिक शिवलिंग स्टलाक्माइट से बना हुआ है। गुफा का एक दूसरा रोचक तथ्य यह है कि आप जब भी इसकी खोखली दीवार में किसी चीज से चोट करेंगे तो गुफा की दीवारों के बीच निर्वात की स्थिति होने के कारण संगीत की ध्वनि सुनाई पड़ती है।

यह सामरबार  संस्कृत महाविद्यालय के बिल्कुल नजदीक है। यह जशपुर मुख्यालय से लगभग 120 किलोमीटर दूर बगीचा से आगे है। यह अंबिकापुर से और नजदीक है। वहाँ से इसकी दूरी मुश्किल से 60 किलोमीटर है।

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