मानवीय गतिविधियों के कारण पृथ्वी की जैव विविधता तेजी से घटती जा रही है। पृथ्वी की अनेक पशु व पाद्प प्रजातियां विलुप्त हो चुकी हैं।

घटती जैव विविघता को बचाने की आवश्यक्ता

भूगोल और आप

प्रदूषणः– जल, वायु, तथा भूमि प्रदूषण के कारण कई जन्तु व पादप प्रजातियों को खतरा पहुँचा है। उत्तरी अमेरिका में प्रदूषित जल के कारण बड़ी संख्या में बतखों, सारसों एवं बगुलों की मौत हुई।

नई प्रजातियों का आगमनः- कई क्षेत्रों में नए जीवों/प्रजातियों के introduction  कारण पहले से मौजूद जीव/प्रजातियां प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाने के कारण खत्म होने लगती हैं विभिन्न दूरवर्ती द्वीपों पर इस प्रक्रिया का ज्यादा प्रभाव पड़ा है। इन द्वीपों पर अलग-अलग ढ़ंग से विकसित हुई प्रजातियां मानव तथा विभिन्न शिकारी जन्तुओं के प्रति सुरक्षात्मक प्रणालियों से लैस नहीं होती। जिन द्वीपों पर प्राक ऐतिहासिक काल अथवा बाद में आने वाले खोजकर्ताओं एवं विजेताओं ने नई आक्रामक प्रजातियों का प्रवेश करवाया (चूहों से लेकर खरपतवार तक), वहाँ कई स्थानीय प्रजातियां विलुप्त हो गईं।

जैव विविधता परिरक्षण की आवश्यकता: जैव विविधता का परिरक्षण मानव जीवन के लिए महत्वपूर्ण है। इसकी हानि से मानव को गम्भीर खाद्य संकट का सामना करना पड़ सकता है। अनेक जंगली पौधों की किस्में बहुमूल्य पोषकों की आपूर्ति के साथ-साथ घरेलू फसलों के विकास हेतु आनुवांशिक पदार्थों का एक समृद्ध स्रोत भी उपलब्ध कराती हैं। उष्णकटिबन्धीय ecologist  नार्मन मेयर्स के अनुसार लगभग 80 हजार जंगली पादप प्रजातियां मानव के लिए उपयोगी सिद्ध हो सकती हैं परन्तु अति चारण, तनोन्मूलन, कृषि भूमि का विस्तार के फलस्वरूप प्रजातियों का विनाश होता जा रहा है। UNDP. के अनुसार तीसरी दुनिया के पादप जन्तु एवं जीव संसाधनों द्वारा प्रतिवर्ष 30 अरब डॉलर की औषधियों का उत्पादन किया जाता है। विभिन्न अध्ययनों से ज्ञात होता है कि विविध जैविक प्रजातियों द्वारा पर्यावरणीय संसाधनों का बेहतर रखरखाव किया जा सकता है। Ecosystem में जीवों के मध्य पाए जाने वाले जटिल अन्तर सम्बन्धों की व्याख्या हेतु व्यापक शोध की आवश्यकता है।

अनुमान के अनुसार रोगजनक जीवों के 95 प्रतिशत का नियंत्रण जैवनाशी जन्तुओं द्वारा किया जाता है। इन जैवनाशी जीवों के बारे में जानकारी न होने के कारण मनुष्य इन्हें अनजाने में समाप्त कर सकता है। जिसके फलस्वरूप बिमारियों का विस्तार एवं जैव विविधता की भारी क्षति संभव है। अनेक जनजातियों  तथा संस्कृतियों के लिए प्रकृति की सुरक्षा अत्यधिक धार्मिक महत्व रखती है। इन परम्पराओं का प्रयोग जैव विविधता के संरक्षण हेतु किया जाता है।

जैव विविधता एवं संरक्षण : पृथ्वी के धरातल पर जैव विविधता एक समान वितरित नहीं है। सामान्यतः ऊष्ण कटिबंधों एवं भूमध्य रेखीय प्रदेशों में अधिक प्रजातियां तथा विभिन्न habitats में प्रजातियों के संगठन में अधिक परिवर्तनशीलता पाई जाती है। द्वीपों तथा पर्वतीय चोटियों जैसे अलगाव के क्षेत्रों में प्रजातिगत विविधता ऐसे क्षेत्र के आकार के अनुसार बढ़ती है। ऐसी विविधता का अधिकांश हिस्सा स्थानीय प्रजातियों के कारण विकसित होता हैं। ऐसे भौगोलिक क्षेत्र जिनमें जैव विविधता विशेषकर उच्च स्तर पर पाई जाती है  hotspots  कहलाते हैं। ये वैश्विक जैव विविधता के परिरक्षण की महत्वपूर्ण रणनीति है। ऐसे hotspots  की पहचान करने तथा उनकी सुरक्षा हेतु संरक्षण के उपाय करने में निहित है। इन उपायों के कारण जैव विविधता के संरक्षण के प्रयास सर्वाधिक प्रभावी बनाए जा सकते हैं।

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