जैव विविधता ह्रास के प्राकृतिक कारण

भूगोल और आप

1) जैव विविधता ह्रास के प्राकृतिक कारण: जीवाश्म प्रमाण बतलाते हैं कि पृथ्वी पर जीवन की शुरूआत के समय मौजूद मूल प्रजातियों के 99 प्रतिशत से अधिक का विलोपन हो चुका है। इनमें से अधिकांश प्रजातियां मनुष्य के आगमन से पूर्व ही समाप्त हो चुकी थीं। बदलते हुए भौतिक पर्यावरण के अनुसार जो प्रजातियां अनुकूलन कर लेती हैं वे नई प्रजातियों के रूप में विकसित हो जाती हैं। इस प्रक्रिया में जो प्रतिस्पर्धी प्रजातियां अनुकूलन नहीं कर पाती हैं वे विलुप्त हो जाती हैं। जैसे लघु आकार वाले हिप्पोहिप्पस का आधुनिक काल के विशाल घोड़े में विकसित होना अनुकूलन का उदाहरण है।

कई दशाओं में सम्पूर्ण प्रजाति का विलोप हो जाता है। आज से 6 करोड़ वर्ष पूर्व जलवायु परिवर्तनों के कारण डाइनासोर का सम्पूर्ण परिवार विनष्ट हो गया। किन्तु मेडागास्कर द्वीप पर मिलने वाली विशाल छिपकलियों को इनका वंशज माना जाता है। रोगकर्ता जीव, किसी क्षेत्र में जब पहली बार प्रवेश कर जाएं तो वहाँ कई प्रजातियों का विनाश हो जाता है। Chinese Fungus  (कवक) के कारण 1904 के बाद से अमेरिकी चेस्टनट वृक्षों का चिन्ताजनक ढ़ंग से ह्रास हो रहा है।

2)         जैव विविधता ह्रास के मानवीय कारक- हावर्ड वि.वि. के प्रो. ए.ओ. विल्सन के अनुसार प्रतिवर्ष 20 हजार प्रजातियां विलुप्त हो जाती हैं। इनका सर्वाधिक क्षरण ऊष्ण कटिबन्धीय देशों में होता है जहाँ पृथ्वी की 90 प्रतिशत प्रजातियां पाई जाती हैं।

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