तटवर्त्ती अंटार्कटिका में ताप वृद्धि की जांच

तटवर्त्ती अंटार्कटिका में तापवृद्धि की जांच

अंटार्कटिका क्षेत्र के तटवर्ती क्षेत्रों में ताप वृद्धि का प्रतिकूल प्रभाव समुद्र के जलीय जोनों औऱ वहाँ के पर्यानरण पर पड़ रहा है । ताप वृद्धि अपेक्षा से अधिक है ।
भूगोल और आप

अंटार्कटिका से प्राप्त यांत्रीय डाटा की जांच से स्पष्ट होता है कि अधिकतर भागों में वातावरण के तापमान में वृद्धि होने से हाल के दशकों में इस महादेश में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं। विशेषकर पश्चिमी अंटार्कटिका और अंटार्कटिका प्रायद्वीप में वार्षिक तापवृद्धि के सबसे अधिक लक्षण पाए जाते हैं। इसके विपरीत पूर्वी अंटार्कटिका में बहुत कम तापवृद्धि का अनुभव किया गया है। हालांकि, हाल के अध्ययनों से यह स्पश्ट होता है कि तापवृद्धि ने तटवर्त्ती पूर्वी अंटार्कटिका के कई स्थलों को प्रभावित किया है। इसकी जटिलता महत्वपूर्ण है।

स्रोत  :– नेशनल रिमोट सेंसिंग हैदराबाद , भारत

राष्ट्रीय अंटार्कटिका और महासागर अनुसंधान केन्द्र, गोवा द्वारा संचालित अंटार्कटिका में वार्षिक वैज्ञानिक अनुसंधान अभियानों के अन्तर्गत वैज्ञानिक अन्वेषण के लिए बड़े प्राकृतिक प्रयोगशाला के तौर पर अंटार्कटिका के एकल पर्यावरण का उपयोग किया जाता है, जिससे वैश्विक पर्यावरणीय परिवर्तन को समझने में मदद मिलती है। भारत ने 1983 में अंटार्कटिका के दक्षिण गंगोत्री में अपना पहला केन्द्र स्थापित किया था और उसके बाद 1998 में उसने मैत्री में अपना दूसरा स्थायी केन्द्र स्थापित किया था। तीसरा केन्द्र भारती पूर्वी अंटार्कटिका के लार्समन पहाड़ी क्षेत्र में स्थापित किया जा रहा है।

वर्तमान अध्ययन के अन्तर्गत हिमचादर, महासागर, समुद्री हिम और वातावरण के जटिल अंर्तसंबंध के साथ उप-वार्षिक से शताब्दी के समय के पैमाने पर परिवर्तित हो रही अंटार्कटिक जलवायु प्रणाली का अन्वेषण किया जा रहा है। कुछ उपलब्ध अभिलेखों पर आधारित अंटार्कटिका से प्राप्त यांत्रिक डाटा की जांच से यह स्पष्ट हुआ है कि अधिकतर भागों में वातावरण के तापमान में वृद्धि होने से हाल के दशकों में इस महादेश में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं। विशेषकर पश्चिमी अंटार्कटिका और अंटार्कटिका प्रायद्वीप में वार्षिक तापवृद्धि के सबसे अधिक लक्षण पाए जाते हैं। इसके विपरीत पूर्वी अंटार्कटिका में बहुत कम तापवृद्धि का अनुभव किया गया है। हालांकि, हाल के अध्ययनों से यह स्पष्ट होता है कि तापवृद्धि ने तटवर्त्ती पूर्वी अंटार्कटिका के कई स्थलों को प्रभावित किया है। इसकी जटिलता महत्वपूर्ण है। या कतिपय स्थानों पर हल्का ठंढापन भी देखा गया है। तथापि, अंटार्कटिक जलवायु की भौगोलिक और स्थानिक जटिलता को अभी भी बहुत कम समझा गया है क्योंकि सीमित और कम अवधि के प्रेक्षण डाटा ही उपलब्ध हो पाए हैं।

हिम सारतत्व के छद्म अभिलेखों के विश्लेषणों से एक क्रियाविधि प्राप्त होती है जो सर्वाधिक विशुद्ध विधियों में से एक है, जिसके आधार पर यांत्रीय सीमाओं से परे अंटार्कटिक जलवायु परिवर्तन की पुनर्रचना की जा सकती है। ध्रुवीय क्षेत्रों से प्राप्त हित सारतत्व के अभिलेखों से तापमान संरंचना और अवशेष गैसों जैसे वातावरण के प्रमुख पैरामीटरों के बारे में सतत् एवं काफी सुदृढ़ छद्म अभिलेख प्राप्त होते हैं। विभिन्न प्रकार के प्रयुक्त छदम परिवर्तकों में ऑक्सीजन 18 O और हाईड्रोज़न O के स्थायी समस्थानिक अनुपातों से तापमान में हुए विगत के परिवर्तनों के बारे में सर्वाधिक महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है। इसके अतिरिक्त, हिम सारतत्व की आयन और अवशेष धातु संरचना जैसे हित रसायनिक पैरामीटरों का वातावरणीय परिसंचरण, वैश्विक ज्वालामुखी, धूल आदान, समुद्री हिम क्षेत्र/संकेन्द्रण, समुद्री उत्पादकता के साथ-साथ पर्यावरणीय प्रदूषण के मामले में विगत के परिवर्तनों का पुनर्रचना करने हेतु गहन उपयोग किया जाता है।

अंटार्कटिका गर्म हो रहा है

वैश्विक तापवृद्धि के संदर्भ में अंटार्कटिक पर्यावरणीय परिवर्तन के इतिहास वृत के महत्व पर विचार करते हुए भारतीय अनुसंधानकर्त्ताओं ने पूर्वी अंटार्कटिका के तटवर्ती क्षेत्रों से हिम के सारतत्व के अभिलेखों को फिर से प्राप्त करने और उनका अध्ययन करने हेतु क्रमबद्ध प्रयास किए हैं। वार्षिक से उप-वार्षिक वियोजन के साथ विगत कुछ शताब्दियों के दौरान तटवर्ती अंटार्कटिक परिवर्तनीयता को आगे और समझने के लिए पूर्वी अंटार्कटिका के तटवर्त्ती स्थलों से कई हिम सारतत्व एकत्रित किए गए हैं। इनमें से मध्य ड्रोनिंग मॉड भू-क्षेत्र (आईएनडी-22/बी 4 और आईएनडी-बी 5) से दो हिम सारतत्वों के विभिन्न छद्म चित्र 2 पैरामीटरों के लिए विश्वसनीय कालानुक्रमिक व्यवरोधों के साथ गहन अध्ययन किया गया। जहां आईएनडी-25/बी 5 ने विगत 100 वर्षों (1905-2005) के उच्चवियोजन अभिलेख उपलब्ध कराए हैं; वहीं आईएनडी-22/बी 4 सारतत्व तटवर्त्ती पूर्वी अंटार्कटिका में जलवायु परिवर्तन के विगत-470 वर्षों (1530-2002) का प्रतिनिधित्व करता है। आईएनडी-25/बी 5 d18 O के माध्यमों से जुड़ा प्रतीत होता है। (एसएएम) और एल नीनो दक्षिणीदोलन (ईएनएसओ) के साथ महत्वपूर्ण संबंध को स्पष्ट किया। विलोमतः एक दशकीय पैमाने पर ईएनएसओ का प्रभाव घटता जाता है और d18O  एसएएम के बीच एक महत्वपूर्ण संबंध स्थापित होता है। आईएनडी-25/ बी 5 हिम सारतत्व के साथ क्षेत्र में d18O   तापमान संबंध का अनुप्रयोग से वर्ष 1905-2005 के दौरान  औसत वायु तापमान-25.50 सेंटीग्रेड होने का  पता चला है। इसकी तुलना में आईएनडी-22/बी 4 के विस्तारित d18O   के अभिलेखों से 1530-2002 के दौरान औसत तापमान -19.30 सेंटीग्रेड होने का पता चला है।

आईएनडी-25/बी 5 के पुनर्रचित तापमान अभिलेख ने पूरी शताब्दी (1905-2005) के लिए 0.10 सेंटीग्रेड/10 वर्ध की तापवृद्धि प्रवृत्ति के साथ 10 सेंटीग्रेड औसत तापवुद्धि को प्रदर्शित किया है। अभिलेखों से वर्ष 1930-2005 के दौरान 30 सेंटीग्रेड की भारी तापवृद्धि (-0.40 सेंटीग्रेड /10 वर्ष) के बारे में भी पता चला है। आईएमडी-22/बी 4 के तापमान अभिलेख ने डाल्टन और मॉन्डर मिनिमा जैसी घटती सौर गतिविधि की अवधि के दौरान अपेक्षाकृत अधिक नकारात्मक d18O  मूल्यों को प्रदर्शित किया है, जो अंटार्कटिक जलवायु पर सौर गतिविधि के महत्वपूर्ण प्रभाव को दर्शाता है। हाल के दशकों के दौरान इस स्थल के लिए अनुमानित तापवृद्धि प्रवृत्ति -0.60 सेंटीग्रेड थी तथा तापवृद्धि अपेक्षाकृत अधिक रही है।

हिम सारतत्वों के पुनर्रचित तापमान अभिलेखों के साथ-साथ उपलब्ध प्रेक्षण डाटा इस प्रकार यह सुझाता है कि पूर्वी अंटार्कटिका में ड्रोनिंग मॉड भूमि के तटवर्त्ती  क्षेत्रों में हाल के वर्षों में उल्लेखनीय तापवृद्धि हुई है। इन निष्कर्षों के तटवर्त्ती अंटार्कटिक हिम चादर स्थायित्व एवं संभावित समुद्र तल में परिवर्तनों के लिए महत्वपूर्ण निहितार्थ हैं। एक व्यापक परिप्रेक्ष्य में, ऐसी तापवृद्धि के प्रभावों से नाजुक अंटार्कटिक पारि-प्रणाली प्रभावित हो सकती थी  । तापविद्ध के कारण समुद्री हिम को होने वाले नुकसान का अंटार्कटिक खाद्य श्रृंखला प्रणाली पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है क्योंकि समुद्री हिम शैवाल में होने वाली कमी से क्रिल मछली की संख्या प्रभावित होगी जिसके परिणामस्वरूप एडीली पेंग्विन की संख्या पर प्रभाव पड़ेगा।

हमारे अध्ययन से जहां नोवो अंटार्कटिक केन्द्र के डाटा के अनुसार हाल की तापवृद्धि के यांत्रीय अभिलेख की पुष्टि होती है, वहीं दक्षिणी ध्रुव एमंडसेन स्कॉट केन्द्र पर प्रेक्षित हल्के ठंढ़ का खंडन होता है। पर्यावरणीय दशाओं में इतनी अधिक भौगोलिक और स्थानिक विषमता को देखते हुए बहिर्वेशनों पर आधारित सम्पूर्ण पूर्वी अंटार्कटिका में व्याप्त तापमान प्रवृत्ति के वर्तमान आंकलन हेतु कुछ केन्द्रों के अभिलेखों के उपयोग का सशक्त परीक्षण किया जाना जरूरी है। यह सुझाव दिया गया है कि भौगोलिक तौर पर वितरित हिम सारतत्व से प्राप्त तापमान प्रोफाइलों से बड़े अन्तरों को पाटने के साथ-साथ अंटार्कटिका में जलवायु लेखों को विसतारित करने हेतु बहुमूल्य डाटा की प्राप्ति हो सकती है।

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