विद्युत उत्पादन

सौर ऊर्जा से प्राप्त विद्युत का भारतवर्ष में अक्षय उत्पादन

By: Staff Reporter
भविष्य में सौर ऊर्जा से प्राप्त विद्युत की उत्पादन लागत, परम्परागत रूप से प्राप्त विद्युत ऊर्जा की उत्पादन लागत से कम हो जायेगी, ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है।
भूगोल और आप

 सभी प्रकार की ऊर्जा का स्रोत सूर्य है। विश्व में अधिकतम मात्रा में पायी जाने वाली तथा कभी समाप्त नहीं होने वाली ऊर्जा सूर्य की ऊर्जा ही है। पृथ्वी तथा जीव मण्डलीय परिस्थितिकी तंत्र को तीन स्रोतों से ऊर्जा प्राप्त होती है-

भौतिक विकिरण द्वारा 2)  पृथ्वी के गुरूत्व द्वारा 3) पृथ्वी के अन्तर्गत बलों द्वारा, परन्तु सौर्य विकिरण पृथ्वी की ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है। पृथ्वी  के वायुमण्डलीय तंत्र की कार्यशीलता एवं उसका अनुरक्षण रखरखाव सौर्य ऊर्जा द्वारा ही संभव हो पाता है।

भारत में क्षैतिज सतह पर प्रवृति वार्षिक औसत वैश्विक सौर विकिरण प्रतिदिन लगभग 5.5 किलोवाट घंटा प्रति वर्गमीटर है। देश के अधिकांश भागों मे 300 स्वच्छ सूर्य वाले दिवसों के साथ सौर विद्युत उत्पादन आज भारत में उपलब्ध सर्वाधिक दक्ष तथा विश्वसनीय हरित ऊर्जा में से एक है।

पृथ्वी पर ऊष्मा का प्रधान स्रोत सूर्य है। सूर्य की सतह पर 6000 सेल्सियस तथा केन्द्र पर 20000000 ताप का अनुमान लगाया जाता है । 186000 मील प्रति सैकण्ड की गति से चलती हुई लघु तरंगें सूर्य ताप कहलाती है।

हमारे वायुमण्डल की ऊपरी सतह पर मिलने वाली सौर ऊर्जा 1.353 किलोवाट प्रति वर्ग मीटर है। सूर्य के धरातल के प्रत्येक वर्ग इंच से विकिरण ऊर्जा 100000 अश्व शक्ति के बराबर होती है। सूर्य से औसत दूरी पर 1.94 ग्राम कैलोरी प्रति वर्ग सेंटीमीटर प्रति मिनट प्राप्त होती है। इसे सौर स्थिरांक (Solar Constant) कहते हैं।  यदि प्रति दिन का औसत लगाया जाये तो इसकी  विद्युत उत्पादन मात्रा 4.5 से 6 किलोवाट प्रति वर्ग मीटर प्रतिदिन मिलती है जो स्थल की अक्षांश, ऊंचाई, मौसम आदि पर निर्भर करती है।

विद्युत उत्पादन | सौर ऊर्जा के दोहन हेतु दो प्रकार की तकनीक प्रचलित है:-

  • सौर थर्मल तकनीक:- इसमें सौर ऊर्जा के माध्यम से बॉयलर में पानी को गर्म किया जाता है व इस गर्म पानी से भाप उत्पन्न होती है। इस प्रकार उपलब्ध भाप से स्टीम टरबाईन के माध्यम से अल्टरनेटर चलाकर विद्युत उत्पादित की जाती है।
  • सौर फोटो वोल्टीक प्रणाली:- इसमें सौर पैनल्स के माध्यम से सीधे ही विद्युत उत्पादित की जाती है। सौर सेल्स में डी.सी. विद्युत का प्रवाह होता है। जिसे बैट्रियों में संग्रहित कर लिया जाता है। यदि डी.सी. विद्युत के स्थान पर ए.सी. विद्युत की आवश्यकता है तो सौलर सेल्स के माध्यम से उत्पादित डी.सी. विद्युत को ‘ पावर कंडिशनिंग यूनिट’ के माध्यम से ए.सी. विद्युत में परिवर्तित कर इसे प्रसारण तंत्र (ग्रिड) में प्रवाहित कर दिया जाता है।

सौर ऊर्जा की प्रतिस्पर्धात्मक लागत तथा वृहद स्तर पर विद्युत उत्पादन संभावना के कारण विश्व एक महत्वपूर्ण तकनीकी क्रांति की ओर अग्रसर हो रहा है। फॉसिल फ्यूल के रिक्तिकरण तथा पूर्णतः सीमित भण्डार होने के कारण परम्परागत ऊर्जा स्रोतों से विद्युत उत्पादन की दर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। दूसरी तरफ तकनीकी अनुसंधान तथा विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में सौर ऊर्जा की प्रचुर उपलब्धता के कारण सौर ऊर्जा से विद्युत उत्पादन की दर में आमूलचूल परिवर्तन संभव है। ऐसा अनुमान है कि आगामी लगभग 10 से 15 वर्षों में सौर ऊर्जा उत्पादन लागत परम्परागत ऊर्जा उत्पादन लागत से कम हो जायेगी। प्रकृति में कुछ ऐसे पदार्थ हैं जिनको सूर्य के प्रकाश में रखने पर उनकी अवरोध शक्ति कम हो जाती है एवं वह प्रवाहक बन जाते हैं। ऐसे पदार्थों को अर्द्धवचालक कहते हैं। ऐसे ही पदार्थ का प्रयोग सौर ऊर्जा को सीधे विद्युत में परिवर्तित करने के काम में लिया जा सकता है। ये पदार्थ है सिलिकॉन, जरमोनियम, गैलेनियम, अर्सेनाइड इत्यादि।

विद्युत उत्पादन | सौर फोटो वोल्टीक संयंत्र –

सौर फोटो वोल्टीक संयंत्रों की कार्य प्रणाली बहुत ही सरल है। सोलर पी.वी संयंत्र के मुख्य अवयव हैं:-

1) सोलर पी.वी संयंत्र मुख्य पैनल 2) चार्ज कंट्रोलर 3) बैट्री 4)लोड (लाइट) 5) अन्य कम्पोनेन्ट

 कार्य प्रणाली:- दिन के समय सूर्य की रोशनी से सोलर पी.वी संयंत्र मुख्य पैनल द्वारा डी.सी विद्युत का उत्पादन होता है जिससे बैट्री चार्ज की जाती है। बैट्री से ऊर्जा प्राप्त होती है। यह प्रकिया निरंतर चलती रहती है। संयंत्र मे पैनल एवं बैट्री की डिजाइन इस प्रकार से तैयार की जाती है कि यदि दो-तीन दिन तक भी सूर्य न निकले तो भी संयंत्र कार्य करता रहे। सोलर पी.वी  का दिन में प्रयोग की भी ऊर्जा की आवश्यकता पूर्ति हेतु किया जा सकता है।

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने एक उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना का विकास किया है जिसका विशिष्ट उद्देश्य निम्नलिखित को हासिल करना है रू

  • देश भर में परियोजना विकास को सौर विद्युत संयंत्र स्थापित करने के लिए प्रेरित करना ताकि उनकी व्यवहार्यता को सिद्ध किया जा सके।
  • सौर विद्युत के लिए उपयुक्त प्रशुल्क का निर्धारण करने में विनियामक आयोगों की सहायता करना।
  • उपलब्ध सौर विकिरण के सम्बन्ध में विद्युत उत्पादन सम्बन्धी क्षेत्र निष्पादन डाटा एकत्र करना।

4) उच्च प्रशुल्क आधारित सौर विद्युत के दीर्घावधिक लाभों को ध्यान में रखते हुए इसकी खरीद के सम्बन्ध में उपयोगिताओं के बीच अपेक्षित जागरूकता अभिप्रेरित करना। आशा है यह उपाय देश में सौर विद्युत उत्पादन की लागत कम करने में परिणामी सिद्ध होंगे।

देश में सौर ऊर्जा क्षेत्र की वृद्धि को प्रेरित करने के लिए अनेक उपाय किये है, कुछ प्रमुख उपाय निम्नलिखित हैं :-

1) अनेक सौर ऊर्जा क्षेत्र प्रणालियों सम्बंधी आर्थिक सहायता।

2) प्रयोक्ताओं तथा विनिर्माताओं को उदार ऋण उपलब्ध कराने के लिये ब्याज सम्बन्धी आर्थिक सहायता।

3) कुछ कच्ची सामग्री संघटको तथा उत्पादों पर रियायती या शून्य आयात शुल्क।

4) उत्पाद शुल्क छूट।

5) प्रथम वर्ष में 80 प्रतिशत त्वरित मूल्य हा्रस।

भारत ने वर्ष 2020 तक 10000 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य तय किया है। यह पहले मौसम परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना के सौर ऊर्जा मिशन का हिस्सा है।

अक्षय ऊर्जा की प्रणालियों की बढ़ती लोकप्रियता ही ऊर्जा के वैकल्पिक साधनों की ओर विशिष्ट प्रतिमान अंतरण हेतु पर्याप्त है। जहां तक अक्षय ऊर्जा का सम्बन्ध है, सौर विद्युत निश्चत रूप से प्राथमिक स्पष्ट विकल्प है। स्वच्छ तथा अक्षय ऊर्जा स्रोतो की आकांक्षा से विगत कुछ वर्षों मे भारी वृद्धि हुई है।

प्रकाश वोल्टीक विद्युत उत्पादन देश के उन ग्रामीण क्षेत्रों में भी बिजली ला सकती है जहां पर्याप्त विद्युत  नेटवर्क नही है। यह न केवल शून्य निःस्त्राव प्रौद्योगिकी है बल्कि स्थानीय रोजगार तथा सम्पति सृजन में भी सहायक है जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था में तेजी आयेगी।

ऊर्जा का दैनिक जीवन में अत्यन्त महत्व है। किसी भी अर्थव्यवस्था की वृद्धि ऊर्जा की पर्याप्त आपूर्ति पर निर्भर करती है। प्रति व्यक्ति ऊर्जा की खपत किसी देश की समृद्धि को मापने का एक संकेत है ऊर्जा की मांग मोटे तौर पर पांच क्षेत्रों में होती है। 1) घरेलू 2) उद्योग 3) परिवहन 4) विधुत उत्पादन 5) कृषि

इन पांचों मांगो को सौर ऊर्जा से प्राप्त अक्षय ऊर्जा से एक हद तक पूरा किया जा सकता है।

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