जानलेवा और विनाशकारी होती हैं सुनामी तरंगें

जानलेवा और विनाशकारी होती हैं सुनामी तरंगें

भूगोल और आप

आम तरंगों के विपरीत सुनामी की लहरें बिल्कुल दैत्याकार किस्म की होती हैं। इनकी लंबाई 100 किलोमीटर के आसपास होती है और अवधि कम से कम एक घंटे की। जाहिर है कि समुद्र की आम लहरें जहां आनंद का एक साधन होती हैं, वहीं सुनामी जानलेवा और विनाशकारी होती है।

तरंगदैर्ध्य के मामले में उथली तरंगों की तरह व्यवहार करने वाली सुनामी लहरों की गति, जल की गहराई और गुरूत्वीय त्वरण (9.8 मीटर प्रति सेकंड) के गुणनफल के वर्गमूल के बराबर होती है। 4000 मीटर तक गहराई वाले प्रशांत महासागर से उठने वाली सुनामी तरंगें 700 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलती हैं। 1960 ई. में चिली में उत्पन्न सुनामी तरंगों ने 17 हजार किलोमीटर की दूरी तय की और जापान पर कहर बरपाया। चूंकि किसी तरंग के अपनी ऊर्जा खोने की रफ्तार उसके तरंगदैर्ध्य के व्युत्क्रमानुपाती होती है इसलिए सुनामी तरंगें न केवल बहुत तेज गति से चलती हैं, बल्कि वे अपनी ऊर्जा में बिल्कुल थोड़ा-सा क्षय करते हुए बहुत लंबी दूरी तक जा सकने में सक्षम होती हैं।

सुनामी तरंगें तब पैदा होती हैं, जब समुद्र की सतह अचानक विकृत हो जाती है और सतह में इस बदलाव के चलते नीचे से ऊपर की ओर जल की परतों को सीधे धकेला जाता है। सुनामी आने के विभिन्न कारणों में से तीन सर्वाधिक महत्वपूर्ण कारक निम्न हैं-

अंतःसागरीय भूकम्प: टेक्टोनिक भूकम्प के रूप में पहचाने जाने वाले इस भूकंप के दौरान पृथ्वी की ऊपरी परत में भारी बदलाव आते हैं। ऐसे भूकम्प जब समुद्र की सतह के भीतर होते हैं तो सागरीय पर्पटी में भ्रंश उत्पन्न हो जाता है, जिससे सागरीय भू-पर्पटी में उत्थान अथवा धसान होता है, जिसके परिणामस्वरूप पानी अपनी संतुलन की अवस्था को छोड़ इधर-उधर हो जाता है। जो पानी अपनी जगह से हटता है, वह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के कारण फिर नीचे की ओर आता है। दोबारा संतुलन में जाने के इस प्रयास में सुनामी तरंगें पैदा होती हैं, इसके अलावा सुनामी तरंगें किसी भी उस हलचल के कारण पैदा हो सकती हैं, जो बड़े पैमाने पर पानी को उसकी संतुलन की अवस्था से हटा दे। 

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