भारत और आर्कटिक

आर्कटिक का भारत के लिए विशेष महत्व है क्योंकि भारतीय मानसून और आर्कटिक प्रक्रियाएं जटिल रूप से जुड़ी हुई हैं। आर्कटिक में पहला भारतीय वैज्ञानिक अभियान वर्ष 2007 में आरंभ किया गया था जिसके फलस्वरूप वर्...
दक्षिणी महासागर वैश्विक कार्बन पृथक्करण और चक्रण में प्रमुख भूमिका अदा करता है जो वैश्विक जलवायु पद्धति को काफी प्रभावित करता है। वर्ष 2004 से दक्षिणी महासागर के भारतीय क्षेत्र में इसकी जटिलताओं को सम...
हिमालयी हिमनद एशिया में प्रमुख नदी प्रणालियों की जल व्यवस्था को प्रभावित करते हैं और कई देशों से एक बिलियन से अधिक लोगों के लिए सहायता करते हैं। जलवायु में हो रहा बदलाव हिमालयी हिमनदों के स्वास्थ्य के...
पिछले तीन मिलियन वर्षों में पुनर्निर्मित समुद्र तल परिवर्तन यह दर्शाता है कि समुद्र तल वर्तमान से 5 मी. ऊंचा है जब वैश्विक तापमान प्री इंडस्ट्रियल स्तर के दौरान मौजूद तापमान से 2 डिग्री से. तक गर्म थे...
आर्कटिक का भारत के लिए विशेष महत्व है क्योंकि भारतीय मानसून और आर्कटिक प्रक्रियाएं जटिल रूप से जुड़ी हुई हैं। आर्कटिक में पहला भारतीय वैज्ञानिक अभियान वर्ष 2007 में आरंभ किया गया था जिसके फलस्वरूप वर्ष 2008 में नी-अलसुंड में ‘हिमाद्रि’ की स्थापना हुई थी। भारत वर्ष 2012 में अंतर्राष्ट्रीय आर्कटिक विज्ञान समिति शामिल हुआ और वर्ष 2013 से आर्कटिक परिषद में एक प्रेक्षक है।
दक्षिणी महासागर वैश्विक कार्बन पृथक्करण और चक्रण में प्रमुख भूमिका अदा करता है जो वैश्विक जलवायु पद्धति को काफी प्रभावित करता है। वर्ष 2004 से दक्षिणी महासागर के भारतीय क्षेत्र में इसकी जटिलताओं को समझने और कार्बन पृथक्करण में भूमिका, जैव विविधता और अन्य पृथ्वी प्रणाली प्रक्रियाओं को समझने के लिए 10 सफल वैज्ञानिक अभियान चलाए गए हैं।
हिमालयी हिमनद एशिया में प्रमुख नदी प्रणालियों की जल व्यवस्था को प्रभावित करते हैं और कई देशों से एक बिलियन से अधिक लोगों के लिए सहायता करते हैं। जलवायु में हो रहा बदलाव हिमालयी हिमनदों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है और संभावित रूप से हिमनद झील विस्फोट बाढ़, हिमधाव और भूस्खलन जैसे खतरों में वृद्धि होने की आशंका है।