सुलग्ना चट्टोपाध्याय
संस्थापक-संपादक
भूगोल और आप, नई दिल्ली

सागरों के रहस्य

नाविक दो भिन्न लोकों, जमीन और महासागर में वास करते हैं, जिनमें जमीन व आसमान का अंतर है। उनके निडर दिलों में एक पुकार होती है इतनी अनोखी कि असंख्य उपकरणों के द्वारा सागरों के रहस्यों पर से पर्दा उठाने के लिए गहन समुद्र में गोता लगाने, तलाशने और उमड़ते लहरों को चिन्हित करने की जरूरत का भरोसा दिलाती है। पृथ्वी प्रणाली विज्ञान संगठन का प्रधन संस्थान भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र ;इंकॉइसद्ध, जो हैदराबाद में स्थित है, भारतीय उपमहाद्वीप के चारों ओर विशाल सागरों और महासागरों का बोध् कराने के सर्वाध्कि दुःसाध्य कार्यों में संलग्न है। इस महान कार्य में अभिकर्त्ताओं के तीन समूह हैं। पहला समूह सागर में है-दूर दराज अवस्थितियों में सावधनी के साथ तैनात बूई का एक विविध् नेटवर्क। इनमें से कुछ बूई लंगर हैं, जबकि अन्य पानी के नीचे तैरते हुए विभिन्न गहराइयों तक पहुंचने के लिए अपनी उत्प्लावकता को स्वतः समायोजित करते हैं। वे तापमान और लवणता से लेकर लहरों की ऊंचाई तक की पूरी जानकारी एकत्रा करते हैं। अभिकर्त्ता के दूसरा समूह में अंतरिक्ष में चक्कर लगाते उपग्रह हैं, जो सागरीय बूई से निष्पन्न डेटा को लिंक करते हैं और इसे वास्तविक समय में संस्थान में रखे गए कंप्यूटर के एक समर्पित सारणी को संचारित करते हैं। और अंत में, डेटा कंप्यूटिंग प्रयोगशालाएं हैं जो जल की गहराइयों से निःसृत लघु रहस्यों से निष्कर्षों का समन्वय करती हैं और बड़ी तस्वीर पेश करती हैं। ईएसएसओ-इंकॉइस के लोग सीपफेयरर और तटीय समुदाय को गहन समुद्र के लाभों को भोगने तथा इससे जुड़े खतरों से रक्षा करने में मार्गदर्शक की भूमिका निभाने में सिर उठाकर खड़े हैं। यह विशिष्टांक इस रूप में समुद्र के प्रहरी-भारत के गौरव, ईएएसएसओ-इंकॉइस के वैज्ञानिकों को समर्पित है। ‘भूगोल और आप’ के इस अंक के माध्यम से गोता लगाएं और गहन समुद्र के अति गहन रहस्यों का आनंद लें।